फर्रुखाबाद। ‘हमने तो नमाजें पढ़ी हैं अक्सर, गंगा तेरे पानी से वजू करके’ गंगा-जमुनी तहजीब को जीने वाले शायर नजीर बनारसी की इन पंक्तियों की ही तरह शनिवार को अयोध्या विवाद पर फैसले के बाद फर्रुखाबाद ने एक बार फिर सौहार्द व भाईचारे की परंपरा को सिंचित किया। लोग आपस में मिले-बैठे और अर्से से नासूर बने विवाद का निर्णय होने पर खुशी जाहिर की। सभी ने एक ही बात कही कि यहां तो हम सभी सदियों से गंगा जमुनी तहजीब का ही परिचय देते आए हैं। तभी तो भरत मिलाप वाले दिन एक तरफ मजार पर कव्वाली होती हैं और दूसरी ओर प्रभु श्रीराम की जय जयकार। मोहर्रम का पांचवां ताजिया रामलीला कमेटी के लोग निकालते हैं। राम बरात में मोहर्रम कमेटी के लोग भगवान राम की आरती उतारते हैं।
दरअसल अपरा काशी कही जाने वाली सांस्कृतिक नगरी फर्रुखाबाद में त्योहार और मेले वर्षों से विविधता में एकता के प्रतीक हैं। फतेहगढ़ में रामलीला कमेटी के पदाधिकारी पांचवीं मोहर्रम पर दरगाह सत्तारिया से ताजिया उठाते हैं। रामलीला कमेटी अध्यक्ष स्व. रामकृपाल मिश्रा व दरगाह के सज्जादानशीन स्व. मिर्जा अशरफ अली के समय से मोहर्रम कमेटी के पदाधिकारी राम बरात के दिन रामलीला पदाधिकारियों का माल्यार्पण करते हैं। आरती व पूजन के साथ बरात को रवाना किया जाता है।
वसंत पंचमी के दिन हजरत अली खुसरो की याद में निकाले जाने वाले वसंती गागर जुलूस में हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध, ईसाई व जैन धर्म के धर्म गुरु फूलों से भरे गुलदस्ते लेकर एकता का संदेश देते हैं।
मोहर्रम के साथ नवरात्र आई तो माता की शोभायात्रा के साथ जुलूस भी निकला। रामलीला के दौरान श्रीराम के रथ व ताजिए बगल से निकले तो हिंदू-मुस्लिम एकता जिंदाबाद के साथ हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे भी गूंजे। पक्के पुल पर गणपति महोत्सव में जागरण व छठी मोहर्रम का ताजिया एक दिन होने की स्थिति बनी तो देवी जागरण एक दिन पहले ही करा लिया गया। लगभग तीन दशक पहले जब पूर्व विधायक विमल प्रसाद तिवारी रामलीला अध्यक्ष थे तो भरत मिलाप व जुलूस ए मोहम्मदी एक ही दिन होना था। कायमगंज के पूर्व विधायक अनवार खां की मौजूदगी में मिलजुलकर दोनों आयोजन कराए गए।
कमालगंज के भरत मिलाप में हर वर्ष कमाल बाबा का उर्स साथ-साथ होता है। भरत, शत्रुघ्न जब मजार से होते हुए श्रीराम से मिलने जाते हैं तो उर्स के मंच से भगवान के जयकारे लगते हैं। सभी कव्वाल व कमेटी पदाधिकारी खड़े होकर भरत, शत्रुघ्न पर पुष्प वर्षा करते हैं। शनिवार को अयोध्या विवाद पर महत्वपूर्ण फैसला आने के बाद फर्रुखाबाद ने साबित किया कि यहां एकता की संस्कृति बहती है।