फर्रुखाबाद। चांदी की छह किलो बिछिया की मरम्मत, पालिश करके बरेली देने जा रहे उन्नाव के एक कारीगर का बैग रोडवेज बस अड्डे से पार हो गया। पुलिस पीड़ित को चौकी ले गई और उसकी गलती बताकर रौब गांठा। मुकदमे के बाद तारीखों में आने का हवाला दिया। कोतवाल ने कारीगर को रोडवेज ले जाकर घटनास्थल देखा। बाद में कारीगर कोई कार्रवाई न करने की बात लिखकर दे गया। गहनों की कीमत छह लाख बताई जा रही है।
उन्नाव जिले के शुक्लागंज के मोहल्ला गांधीनगर निवासी दीप कुमार पुत्र रामगोपाल बिछिया बनाने के कारीगर हैं। बरेली के अंबरीश का उनके पास आर्डर था। वह बिछिया बनाकर पालिश करके कानपुर की बस से दोपहर साढ़े 11 बजे रोडवेज बस अड्डे पर पहुंचे। यहां लघुशंका करने को उन्होंने छह किलो चांदी के बिछिया से भरा बैग सीट पर रख दिया। लौटे तो बैग गायब था। पीड़ित ने शोरगुल किया, मगर कुछ पता नहीं चला। सूचना पर कादरीगेट चौकी प्रभारी हरिओम प्रकाश त्रिपाठी रोडवेज बस अड्डे पहुंचे। पुलिस ने उचक्के की खोजबीन करने के बजाय कारीगर को लेकर चौकी में बैठा लिया। पुलिस ने उससे पूछताछ की और कारीगर की ही गलती बताई।
इसके बाद चौकी का एक सिपाही उसे बार-बार मुकदमा लिखवाने के बाद तारीखों पर आने की बात कहता रहा। दोपहर ढाई बजे कोतवाल वेदप्रकाश पांडेय पीड़ित को लेकर रोडवेज बस अड्डे पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल देखा। उससे काफी देर तक पूछताछ करते रहे। कोतवाल ने कहा कि मुकदमा लिखवाना हो, तो तहरीर दे दो, अन्यथा कार्रवाई न करने की बात लिखकर चौकी पर सौंप दो। चौकी प्रभारी पीड़ित को लेकर चौकी चले गए। चौकी प्रभारी हरिओम प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि वह चोर की तलाश कर रहे हैं। हालांकि कारीगर कार्रवाई न करने की बात लिखकर दे गया है। यदि वह मुकदमा लिखवाना चाहेगा, तो जब भी प्रार्थना पत्र देगा, मुकदमा लिखेंगे।
केस एक: एक जुलाई को शहर कोतवाली के मोहल्ला सलावत खां की सीमा माली पत्नी स्व. अवधेश कुमार अपने भतीजे राहुल की शादी में शामिल होने कन्नौज के तेराजाकट जा रहीं थीं। उन्हें रोडवेज पर डाक की गाड़ी में ले जाकर गुरसहायगंज तक छोड़ने की बात कहकर उनके जेवर उतरवा लिए और लिफाफा बदलकर टप्पेबाज फरार हो गया। पीड़िता ने कोतवाली और चौकी के कई चक्कर लगाए, मगर नहीं सुनी गई। गरीब महिला परेशान होकर घर ही बैठ गई।
कोस दो: शाहजहांपुर के थाना आरसी मिशन के गांव चौड़ेरा निवासी वीरेंद्र कुमार चूड़ी का काम करते हैं। वह 20 जुलाई को अपने भाई के साथ 40 हजार रुपये लेकर फिरोजाबाद जा रहे थे। रोडवेज पर बस रुकी, तो चार युवक चढ़े और उन्हें उतरने नहीं दिया। भीड़ लगाकर उनके जेब से नगदी पार कर दी। नीचे देखा, तो दोनों भाइयों ने दो संदिग्धों को दबोचकर पीआरडी जवानों को सौंप दिया। पीआरडी ने दोनों को छोड़ दिया, तो यूपी 112 पर सूचना दी। काफी देर हाथापाई भी हुई थी। पीड़ित ने तहरीर दी, मगर आज तक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। रोडवेज पर सक्रिय उचक्कों का रोडवेज स्टाफ और तैनात सुरक्षा कर्मियों से मिली हुई हैं, इससे इनकार नहीं किया जा सकता।