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अव्यवस्थाएं नहीं हो रहीं दूर, गोशालाओं में तीन गायें मरीं

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सातनपुर स्थित गोशाला में सूखा भूसा खाते गोवंश। - फोटो : FARRUKHABAD
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शासन भले ही गोवंश के संरक्षण पर गंभीर है, लेकिन गोसदनों में गायों के मरने का सिलसिला बंद नहीं हो रहा है। बुुधवार को नगरपालिका की गोशालाओं में फिर तीन गायें काल के गाल में समा गईं। सूचना मिलते ही ईओ ने गोशालाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने कर्मचारियों को व्यवस्था में और सुधार करने के निर्देश दिए। पोस्टमार्टम में गायों की मौत पेट फूलने से होने की पुष्टि की गई है।
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शहर में नगरपालिका की दो गोशालाएं हैं। इसके अलावा शहर से सटे गांव कटरी धर्मपुर में राजकीय गोसदन है। इन तीनों गोशालाओं में करीब 550 गोवंश हैं। गाय, सांड़ व बच्चे एक साथ बंद होने, छाया व चरही की पर्याप्त व्यवस्था न होने से कमजोर गोवंश को भरपेट भूसा भी नहीं मिल पाता।
कई गाय व बछड़े सांड़ों के पटकने से घायल भी हैं। बुधवार को सातनपुर गोशाला में दो गायें मर गईं। इनमें एक कमजोर गाय के गोशाला में भरे कीचड़ में फंसकर गिरने से मरने की जानकारी दी गई है। व्यवस्था के नाम पर चरही में भूसे की जगह गोबर पड़ा था। टंकी भरने के दौरान पानी बहने से गोशाला के गड्ढों में पानी भर जाता है और कीचड़ भी हो जाता है।
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टंजिट हास्टल स्थित गोशाला में भी एक गाय ने दम तोड़ दिया। इससे चार दिन पूर्व ही यहां दो गायें दम तोड़ चुकी हैं। सातनपुर गोशाला में एक माह के भीतर सात गायें मर चुकी हैं। पशु चिकित्सक सतेंद्र सिंह ने बताया कि शहर की अन्ना गायें पॉलिथीन खाती हैं। इससे इनका पेट फूल जाता है और मौत हो जाती है।
गोशालाओं का लगातार निरीक्षण कर आवश्यकतानुसार उपचार करते हैं। सातनपुर गोशाला में मंगलवार को घायल गाय का उपचार करके आए थे। हालांकि कई गायें पॉलिथीन खाने से काफी कमजोर भी हैं।
ईओ बोलीं पेट फूलने से मरीं गायें
नगरपालिका की अधिशासी अधिकारी रश्मि भारती ने बताया कि तीन गायें मरी हैं। इसकी जानकारी पर उन्होंने ट्रांजिट हास्टल व सातनपुर गोशाला का निरीक्षण किया। वहां भूसा व दाना की पर्याप्त व्यवस्था है। उन्होंने इस संबंध में पशु चिकित्सकों से भी बात की और शवों का पोस्टमार्टम कराया। इसमें पॉलिथीन खाने से पेट फूलने से मौत होने की जानकारी दी गई। कर्मचारियों को व्यवस्था और दुरुस्त करने की हिदायत दी गई है।
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