फर्रुखाबाद। बाढ़ का पानी अब गांव में संक्रामक बीमारियों की वजह बनने लगा है। स्वास्थ्य शिविरों के भरपूर दावों के बीच गांव में बीमारियों से पीड़ित लोगों को इलाज की दरकार है। करीब एक माह से बाढ़ के पानी के बीच रह रहे लोग झाेलाछाप के अलावा देसी उपचार कर रहे हैं। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों से बाढ़ग्रस्त इलाकों में उपचार मुहैया कराने की मांग की है।
कंपिल संवाददाता के अनुसार क्षेत्र में करीब एक महीने से अधिक समय से 50 गांवों में बाढ़ का पानी भरा है। पिछले हफ्ते भर से मौसम ने अचानक करवट ली। तीन दिनों तक लगातार बारिश के बाद, निकली कड़क धूप ने गांवों में भरे पानी को गर्म कर दिया। नतीजा क्षेत्र में फैली बीमारियों से ग्रामीण परेशान हैं। गांव मिसतनी निवासी मनोज ने बताया की गांव में बीमारियों से परेशान हैं। गांव मधवापुर में बीमारियों से ग्रामीण दुखी हैं।
गांव सिंघनपुर निवासी पोरन ने बताया की परिवार के लोग बुखार से परेशान हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम, नहीं पहुंच रही है। गांव रौकरी निवासी आकाश शाक्य ने बताया कि उनके तीनों बच्चे, खांसी, जुखाम, बुखार से परेशान हैं। एसडीएम अतुल कुमार ने बताया स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित कर गांवों में दवा वितरित करवाई जाएगी।
अमृतपुर संवाददाता के अनुसार क्षेत्र में बाढ़ से प्रभावित गांव में दवा वितरण के लिए 15 स्वास्थ्य टीम बनाई गई हैं। गंगा व रामगंगा में आई बाढ़ से तहसील क्षेत्र के करीब 125 से अधिक गांव प्रभावित हो चुके हैं। सीएचसी प्रभारी प्रमित राजपूत ने बताया कि अभी करीब 150 गांव में 26 हजार से अधिक मरीजों दवा वितरण की जा चुकी है। सीएचसी प्रभारी की टीम को इमरजेंसी के लिए रखा गया है।
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इन गांव में नहीं पहुंची टीम
अमृतपुर। गंगा में आई बाढ़ के चलते रास्ता बंद होने के कारण गांव किराचन, रोशन नगला, रामप्रसाद नगला, माखन नगला, कलिका नगला, नगला खुशहाली, पंचम नगला, धनी नगला, जटपुरा, मिघन नगला, हमीरपुर परतापुर, नगला दुर्गू, सुंदरपुर, हरसिंहपुर कायस्थ, ऊगरपुर,कछुआ गाढ़ा आंतर,सवितापुर आदि गांव में स्वास्थ्य टीम नहीं पहुंच पाई है। संवाद