21 मार्च से शुरू हो रहे चैत्र नवरात्र को लेकर शहर के देवी मंदिरों में
तैयारियां लगभग पूरी हो गई हैं। मंदिर सजधज कर तैयार हैं। मठिया देवी और
शीतला देवी मंदिर बढ़पुर में सजावट के इंतजाम हो रहे हैं। घट स्थापना का
प्रथम शुभ मुहूर्त सुबह 7.42 से 9.12 बजे तक रहेगा।
शनिवार से चैत्र
शुक्ल पक्ष के नवरात्र का शुभारंभ हो रहा है। शहर के प्रमुख मंदिर गुरुगांव
देवी, मठिया देवी, शीतला देवी मंदिर बढ़पुर, गुरगांव देवी, वैष्णो देवी
भोलेपुर और गमा देवी मंदिर फतेहगढ़ में साफ-सफाई और रंगरोगन का काम लगभग
पूरा हो चुका है। गुरुगांव देवी, शीतला देवी मंदिर और मठिया देवी मंदिरों
में सजावट चल रही है। मठिया देवी के पुजारी छोटे मिश्रा ने बताया कि
अष्टमी पर मंदिर के बाहर विशाल
हवनकुंड बनवाकर उसमें आहुतियां डलवाई
जाएंगी। पहले दिन भीड़ को देखते हुए पुलिस बल की मांग की गई है। मां शीतला
देवी मंदिर कमेटी के अध्यक्ष भीमप्रकाश कटियार का कहना है कि मंदिर को
सजाया जा रहा है। देर रात तक कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।
बताया कि मंदिर
में महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला फोर्स की मांग की है। गुरुगांव देवी
मंदिर की व्यवस्था में लगे सुनील मिश्र ने बताया कि साफ-सफाई का कार्य लगभग
पूरा हो गया है। देर रात तक डेकोरेशन का कार्य भी पूर्ण हो जाएगा।
आचार्य
प्रदीप नारायण मिश्र ने बताया कि नवरात्र पर्व पर कलश स्थापना का प्रथम
शुभ मुहूर्त सुबह 7.42 से 9.12 बजे तक रहेगा। इसके बाद 11.36 बजे से दोपहर
1.30 बजे तक घट स्थापना की जा सकती है।
पूजन सामग्री की दुकानों पर भीड़
नवरात्र
को लेकर गुरुगांव देवी मंदिर, मठिया देवी मंदिर, शीतला देवी मंदिर और
वैष्णों देवी मंदिर के बाहर पूजन सामग्री की दुकानें लग गई हैं। गुरुवार को
इन दुकानों पर भीड़ रही। लोग धूप बत्ती, अगर बत्ती, देशी घी, चंदन, रोली
और हवन-सामग्री खरीदते नजर आए। मठिया देवी मंदिर के पास पूजन सामग्री की
दुकान लगाए। राहुल कुमार ने बताया कि पूजन सामग्री पर इस बार 5 से 10
प्रतिशत की महंगाई हुई है।
प्रमुख मंदिरों में कपाट खुलने और आरती का समय
गुरगांव देवी मंदिर- कपाट सुबह 5 बजे खुल जाएंगे और देर रात 12 बजे बंद होंगे। सुबह 6 और शाम को 9 बजे आरती होगी।
मठिया देवी- मंदिर के कपाट सुबह 6 बजे खुलेंगे और रात 12 बजे बंद होंगे। आरती सुबह 7 और शाम को 9.30 बजे होगी।
शीतला देवी, बढ़पुर- कपाट सुबह 5.15 बजे खुलेंगे और रात 11.45 बजे बंद होंगे। सुबह 5.45 और शाम को 8.45 बजे आरती होगी।
कलश-सकोरा 50 रुपये तक में
स्थापना
के लिए प्रयोग होने वाले मिट्टी के कलश व सकोरा बाजार में 10 से 50 रुपये
तक के बिक रहे हैं। मठिया देवी पर कलश-सकोरा की दुकान लगाए राजेंद्र ने
बताया कि कलश-सकोरा, 10, 20, 35 और 50 रुपये तक के उनके पास उपलब्ध हैं।
पूजन सामग्री
रोली,
चंदन, हल्दी, लाल चुनरी, मइया की चूड़िया, श्रृंगार का सामान, पान,
सुपारी, लौंग, इलायची, मिष्ठान, लाल पुष्प और मइया की पसंद का फूल, धूप,
दीप, केवड़े का इत्र अक्षत पूजा में प्रयोग करें।
हवन का विधान
नवरात्र का व्रत करने के बाद मनुष्य नवमी के दिन हवन कर सकता है। हवन विद्वान आचार्य की उपस्थिति में ही करना चाहिए।
सूखे मेवा के अधिक दाम न लें दुकानदार
नवरात्र को देखते हुए जिलाधिकारी एनकेएस चौहान ने फुटकर और थोक पंसारी
दुकानदारों को आदेश जारी किया है कि नवरात्र पर सूखे मेवा की बिक्री अधिक
मूल्यों पर न करें। उन्होंने कहा कि नवरात्र से पहले जो मूल्य हों उसी पर
बेचें। उन्होंने कहा कि नवरात्र पर्व पर दुकानदार सूखे मेवा के दाम बढ़ाकर
ग्राहकों का शोषण करते हैं।
नवरात्र भर पूजा, बाकी दिन उपेक्षा
नवरात्र में घर-घर देवी पूजा होती है। इस दौरान बेटियों को खूब आदर दिया
जाता है। उनकी पूजा कर व्रत पारायण होता लेकिन बाकी दिनों में बेटियां
तिरस्कार और जुल्म की शिकार होती हैं। सरकारी आंकड़े भी बताते हैं कि
बेटियां सभी जगह महफूज नहीं हैं।
जिले में वर्ष 2014 व इस साल के ढाई
माह के आंकड़ों के मुताबिक बेटियां घर व बाहर सुरक्षित नहीं हैं। तकरीबन
60 फीसदी मामलों में बेटियों को खतरा अपनों से ही होता है। छेड़छाड़,
शारीरिक हिंसा और दहेज उत्पीड़न में भी रिश्ते के लोग ही शामिल रहते हैं।
क्राइम के सरकारी आंकड़ों में भी इसकी पुष्टि होती है। पुलिस बेटियों व
महिलाओं को वारदातों से बचाने में नाकामयाब साबित होती है।
साल में दो
बार नवरात्र आते हैं। इन्हीं दिनों में बेटियों के अधिकारों व उनकी
सुरक्षा के लिए संजीदगी पनपती है। इसके बाद पुराना ढर्रा चालू हो जाता है।
शहर की रागिनी, स्नेहलता, देवेश कुमार, रामानंद का कहना है कि नवरात्र में
हमें बेटी बचाने के साथ ही बेटियों की सुरक्षा का भी संकल्प लेना होगा।
यह भी पूजा
आज
से नवरात्र शुरू हो रहे हैं। मां की ज्योति जलाने, पूजा के साथ ही स्कूल न
जाने वाली बेटियाें को साक्षर करने का संकल्प भी ले सक ते हैं। यह भी एक
पूजा ही होगी। रोजमर्रा के जीवन में मिले खाली वक्त में इन्हें अक्षर ज्ञान
कराया सकता है। यह भी एक पूजा ही होगी।