पुराने मामलों में भले ही एडीपीआरओ को निलंबित किया गया है, लेकिन उनके कार्यकाल में हुई सेंट्रलाइज खरीद का भी उन्होंने जवाब नहीं दिया था। इसकी जांच अभी लंबित चल रही है। जांच पूरी होने पर अन्य जिम्मेदारों के भी फंसने के आसार हैं।
अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने एडीपीआरओ (तत्कालीन प्रभारी डीपीआरओ) अमित कुमार त्यागी को निलंबित कर दिया है। उन पर शौचालय निर्माण की जांच में दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई न करने, गबन की गई धनराशि जिला स्वच्छता समिति के खाते के बजाय ग्राम निधि खाते में जमा कराने सहित तैनाती से पूर्व के कई मामलों में लापरवाही व अनुशासनहीनता के आरोप हैं।
वह करीब तीन वर्ष पांच माह डीपीआरओ के पद पर कार्यरत रहे। उनके कार्यकाल में कोरोना काल के दौरान जमकर सेंट्रलाइज खरीद कर ग्राम पंचायतों से भुगतान कराया गया। दिल्ली की फर्म से पल्स आक्सीमीटर व थर्मलस्कैनर मंगाकर ब्लाक कार्यालय से ग्राम पंचायतों में भेज गए। परिषदीय स्कूलों में इसी फर्म से बिना आदेश झूले लगवाए गए।
फिरोजाबाद की फर्म से थोक में इंसीनरेटर मंगाकर ब्लाक कार्यालय से ग्राम पंचायत के स्कूलों में भेजे गए। इंसीनरेटर खरीद की सीडीओ डॉ.राजेंद्र पैंसिया ने जांच कर फिरोजाबाद की फर्म को काली सूची में डाल दिया था। पल्स आक्सीमीटर व थर्मल स्कैनर की सेंट्रलाइज खरीद को डीएम व पंचायतीराज उपनिदेशक ने संज्ञान में लेकर तत्कालीन प्रभारी डीपीआरओ को पत्र जारी कर जवाब मांगा।
पर कोई जवाब नहीं दिया। इसी बीच जनपद के परिषदीय स्कूलों सहित करीब 1600 भवनों में चहेती फर्मों को करीब 10 करोड़ की लागत से रेनवाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाने का ठेका दे दिया गया।
इस मामले में जिलाधिकारी व उपनिदेेशक ने पत्र जारी किया, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया। एडीपीआरओ ने सभी एडीओ को उसी तर्ज पर पत्र जारी कर रिपोर्ट मांगने की औपचारिकता पूरी कर पल्ला झाड़ लिया।
एडीपीआरओ लापरवाही व अनुशासनहीनता के मामले में निलंबित हो गए। अभी सेंट्रलाइज खरीद के मामले में जांच लटकी है। उपनिदेशक पंचायतीराज अभय कुमार शाही ने बताया कि उन्होंने एक बार पत्र जारी करने के बाद रिमाइंडर भी भेजा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अब फिर रिमाइंडर भेजकर रिपोर्ट मंगाई जाएगी। अनियमितता मिलने पर कार्रवाई होगी।