फोटो-34 कमालगंज मंडी में बिकने आए आलू को देखते व्पापारी, आढ़ती व किसान। संवाद
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कमालगंज। पश्चिम बंगाल में इस बार आलू की बंपर पैदावार से बाहर की मंडियों में आलू के भाव का गणित बिगड़ गया। वहां का आलू आसपास के प्रांतों में पहुंच रहा है। इससे यहां के आलू की मांग कम हुई है और भाव भी कम चल रहे। कमालगंज मंडी में बृहस्पतिवार को कमजोर आलू 362 रुपये और अच्छा आलू 502 रुपये क्विंटल तक बिका। जबकि छट्ठा 283 रुपये पैकेट यानी 566 रुपये क्विंटल बिका।
अगेती मक्का करने के लिए किसान इस समय आलू की खोदाई कर माल मंडी में बेच रहे हैं। बृहस्पतिवार को मंडी में 11 हजार पैकेट आलू आया। रोग लगे आलू का भाव 400 रुपये क्विंटल से नीचे रहा। इसे व्यापारियों ने 181 रुपये पैकेट से 201 रुपये तक खरीदा। सामान्य आलू 211 से 251 रुपये पैकेट बिका। जबकि बड़े साइज का छट्ठा 283 रुपये पैकेट बिका। आढ़ती संघ अध्यक्ष सुनील गुप्ता व पूर्व अध्यक्ष संजय कमल का कहना है कि जब छोटे साइज का बीजा गुल्ला व बड़े साइज का छट्ठा अलग होकर आएगा तो छट्ठा के भाव सुधर सकते हैं।
व्यापारी इस्लाम निराला, इशरत निराला, अफसीर व इशरार का मानना है कि इस बार जो कच्ची फसल की रिकार्ड तोड़ मंदी आई है, उसकी एक बड़ी बजह पश्चिम बंगाल में आलू की बंपर पैदावार है। वहां इस बार 30 प्रतिशत उत्पादन बढ़कर कुल 130 लाख टन उत्पादन का अनुमान है। वहां के शीतगृहों में मार्च की शुरुआत में भंडारण शुरू होगा। तब तक जो भी माल निकलेगा, वह बाजार में ही जाएगा। बंगाल से बिहार, उड़ीसा, झारखंड व असम में भी आलू जाता है।