मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, नगर शिक्षा अधिकारी, तहसीलदार सदर, लेखपाल समेत सात के खिलाफ शहर कोतवाल को रिपोर्ट लिखने का आदेश दिया है। यह आदेश गलत पता दर्शाकर विद्यालय की मान्यता लिए जाने के मामले में दिया गया है।
शहर कोतवाली के बढ़पुर निवासी कमल कुमार ने विकास नगर कनपटियापुर में स्थित एसबीएस प्रीपरेटरी स्कूल के प्रधानाध्यापक बलवीर सिंह, प्रबंधिका राममूर्ति, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, लेखपाल, सदर तहसील के राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार सदर और नगर शिक्षा अधिकारी के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया कि एसबीएस प्रीपरेटरी स्कूल की मान्यता विकास नगर कनपटियापुर दिखाकर ली गई है।
जबकि विद्यालय विकास नगर में संचालित नहीं होता है। डीएम से 22 फरवरी 2015 को की गई शिकायत पर मामले की जांच हुई। तहसीलदार सदर, हलका लेखपाल और राजस्व निरीक्षक ने 31 मार्च 2015 को दी जांच रिपोर्ट में शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि कर गलत पता दर्शाकर मान्यता लिए जाने की आख्या दी थी। इस पर बीएसए ने नौ अप्रैल 2015 को प्रबंधिका को विद्यालय संचालन बंद करने का आदेश दिया।
इसकी मान्यता समाप्ति की कार्रवाई करने के आदेश नगर शिक्षा अधिकारी को दिया। इसकी जानकारी मिलने पर विद्यालय की प्रबंधिका ने तहसीलदार सदर, लेखपाल और राजस्व निरीक्षक से मिलकर दोबारा से जांच करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। दोबारा हुई जांच में अधिकारियों ने पहले दी गई रिपोर्ट के स्थान पर सही पते से मान्यता लिए जाने की आख्या दे दी।
इस रिपोर्ट के आधार पर विद्यालय का संचालन बंद नहीं किया गया और न मान्यता समाप्ति की कार्रवाई गई। याचिका को अधीनस्थ अदालत ने 27 जनवरी 2016 को खारिज कर दिया गया था। तब याचिकाकर्ता ने जिला एवं सत्र न्यायालय में अपील दाखिल की। अपर एवं सत्र न्यायालय में अपील की सुनवाई होने के बाद न्यायाधीश शाजिया नजर जैदी ने अधीनस्थ न्यायालय के आदेश को चार जुलाई 2016 को खारिज कर दोबारा सुनवाई करने के आदेश दिए।
अपर एवं सत्र न्यायालय के आदेश पर सीजेएम ने याचिका पर दोबारा सुनवाई कर शहर कोतवाल को रिपोर्ट लिखने का आदेश दिया है। इसमें जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, नगर शिक्षाधिकारी, तहसीलदार सदर, लेखपाल, राजस्व निरीक्षक, विद्यालय प्रबंधिका, प्रधानाध्यापक को आरोपी बनाया गया है।