फर्रुखाबाद/अमृतपुर। सदानीरा मां गंगा के पावन तट पर लगे मेला श्रीरामनगरिया में हवन-पूजन के साथ उठ रही सुगंध वातावरण को शुद्ध कर रही है। चहुंओर भगवत भजन की पावन ध्वनियों से माहौल भक्तिमय है। कल्पवास कर रहे कल्पवासी भी भगवत भजन में लीन हैं। विभिन्न अखाड़ों के संत शुक्रवार से शुरू हो रही शोभायात्राओं की तैयारी में जुटे हैं।
बुधवार को मेला क्षेत्र में भगवत भजनों की बयार बह रही है। संतों के खालसे से 24 जनवरी से शोभायात्राएं शुरू होनी हैं। अखाड़ा परिसर में संत इसके लिए तैयारियां कर रहे हैं। तलवार और लाठी से विभिन्न करतब दिखाने के लिए अभ्यास जोरों पर है। 24 जनवरी को विशुन आश्रम में डंडी संतों की ओर से शोभायात्रा निकाली जाएगी।
श्री अखिल भारतीय पंचतेराभाई त्यागी खालसा से 25 जनवरी को निकलने वाली यात्रा के लिए संत जगदीश दास, निर्मोही अखाड़ा झाड़िया के गंगादास, श्याम दास शोभा यात्रा के दौरान करतब दिखाने के लिए तलवार, पट्टा से अभ्यास करने में जुटे रहे।
वैष्णव संप्रदाय के महंत बाबा मोहनदास ने बताया कि शोभा यात्रा में करतब दिखाने के लिए वृंदावन से खिलाड़ी संतों को भी बुलावा भेजा गया है। बताया कि धूमधाम से शोभायात्रा निकालने की तैयारी है। वहीं आदर्श क्षेत्र में महारुद्र यज्ञ के लिए यज्ञ शाला का निर्माण कराया जा रहा है। महंत ने बताया कि बसंत पंचमी से यज्ञशाला में हवन शुरू होगा।
मेले के सांस्कृतिक पंडाल में भी रासलीला हुई। लीला का आनंद लेने के लिए देर रात तक लोग अपने स्थान पर डटे रहे। मंगलवार रात वृंदावन से आए स्वामी हरगोविंद के निर्देशन में कलाकारों ने रास किया। मोर पंख लगाए कलाकारों का नृत्य देखकर दर्शक ताली बजाए बिना नहीं रह सके। स्वामी हरगोविंद ने बताया कि कन्हैया का रास देखने के लिए स्वर्ग से देवता भी धरती पर आ जाते थे। नसीब वालों को ही यह सौभाग्य मिलता है।
ढाेलक-मंजीरे की धुन पर भजन करती दिखी महिलाओं की टोली
मेला क्षेत्र में बरगदिया घाट के महंत विष्णुदास के खालसा में श्रद्धालु डेरा जमाए हैं। धूप निकलते ही महिलाओं की टोली ढाेलक और मंजीरे की धुन पर भजन करने में तल्लीन रहीं। रामसुंदरी, मुन्नी, रजनी, शांति ने बताया कि गंगा किनारे माघ माह में कल्पवास करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कर्म के हिसाब से मनुष्य को मिला है फल
सांस्कृतिक पंडाल में आचार्य तिलकेंद्र शेखर त्रिपाठी ने रुक्मिणी विवाह की कथा सुनाई। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की दिनचर्या बताई। कहा कि भगवान प्रातः काल उठकर सबसे पहले अपने हाथों को देखते हैं। पृथ्वी माता को प्रणाम कर पैर रखते है। बैल की पीठ पर हाथ फेरने के बाद घृत में अपना चेहरा निहारते हैं। कहा कि रुक्मिणी की मांगलिक कथा सुनने से घर के अंदर एक साल में ही मांगलिक कार्यक्रम होते हैं। कर्म प्रधान है। मनुष्य को कर्म करते रहना चाहिए। भगवान कर्म के हिसाब से हो फल देता है।
ईश्वर की भक्ति से ही मिलती है शक्ति
वैदिक क्षेत्र में चरित्र निर्माण शिविर में सुबह यज्ञ का आयोजन किया गया। आचार्य चन्द्रदेव शास्त्री ने कहा कि पांच कर्म करने वाला मनुष्य देवत्व को प्राप्त करता है। ओम का ध्यान, वेदों का ज्ञान, यज्ञ का अनुष्ठान, सुसंस्कारी संतान और राष्ट्रहित बलिदान है। ये पांच कर्म केवल मनुष्य ही करता है, इसीलिए मनुष्य संसार का सर्वश्रेष्ठ प्राणी है। कु. उदिता आर्या ने करो हवन से प्यार अमृत बरसेगा। पंडित शिवनारायण आर्य, पंडित राजेश आर्य ने भजनों की प्रस्तुति दी। मंच का संचालन स्वामी महेन्द्रानंद ने किया। उत्कर्ष आर्य, उदयराज आर्य, हरिओम शास्त्री, शिशुपाल आर्य, रत्नेश द्विवेदी, रेनू आर्या, ऋतु आर्या, उपासना कटियार रहीं।
मेला रामनगरिया में शोभा यात्रा के दौरान करतब दिखाते साधु। - फोटो : स्रोत परिजन