श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व इस बार रोहिणी नक्षत्र में मनाया जाएगा। पर्व को
लेकर शुक्रवार को बाजार में खासी रौनक रही। लोगों ने भगवान श्रीकृष्ण के
शृंगार का सामान खरीदा। जन्माष्टमी को लेकर शहर में स्थित राधा-कृष्ण मंदिर
भी सजाए जा रहे हैं। नगर पालिका प्रशासन शनिवार को जन्माष्टमी पर्व को
लेकर चूना डलवाएगा और साफ-सफाई भी कराई जाएगी।
इस बार श्रीकृष्ण
जन्माष्टमी रोहिणी नक्षत्र में पड़ रही है। आचार्य योगीराज दबे बताते हैं
कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म
कीलक संवत्सर में भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष में
अष्टमी तिथि को आधी रात में हुआ था। रोहिणी नक्षत्र व चंद्रमा उस वक्त वृष
राशि में थे। इसलिए रोहिणी नक्षत्र में जन्माष्टमी काफी शुभ मानी गई है।
इस बार कई सालों बाद रोहिणी नक्षत्र में ही जन्माष्टमी का पर्व पड़ रहा है।
रोहिणी नक्षत्र शुक्रवार को रात 12.20 बजे से लग जाएगा। यह शनिवार को रात
12.10 बजे तक रहेगा।
अर्थव्यवस्था में सुधार होगा
रोहिणी
नक्षत्र काफी फलदायी है। इस नक्षत्र में जन्माष्टमी से लोगों की व्यापारिक
स्थिति शुभ रहेगी। अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। सूखा और अकाल की स्थिति
नहीं रहेगी। हर व्यक्ति के लिए इस बार जन्माष्टमी बहुत शुभ है। जन्माष्टमी
को लेकर
शुक्रवार को बाजार में रौनक रही। महिलाओं ने लड्डू गोपाल,
मोरमुकुट, भगवान राधा-कृष्ण की मूर्ति, वस्त्र, मोरपंख, मुकुट, मुकुटमाला
सेट, नेत्र, झूला, गद्दा सेट, कलगी और सालिगराम आदि खरीदे। इसके अलावा
परचून की दुकानों से मखाना, मिश्री, गोला, चिरौंजी और किसमिस आदि खाद्य
सामग्री खरीदी।
राधा-कृष्ण मंदिरों में सजावट
पर्व को लेकर
शहर के प्रमुख राधा-कृष्ण मंदिरों में शुक्रवार को सजावट होती रही। शहर के
लोहाई रोड स्थित श्री राधा श्याम शक्ति मंदिर, भारतीय पाठशाला इंटर कालेज
के सामने, घुमना, रेलवे रोड स्थित श्रीराधा-कृष्ण मंदिर और लालसराय टंकी के
पास स्थित मंदिर को झालरों से सजाया गया था। श्री राधा श्याम शक्ति मंदिर
में 6 सितंबर से विशेष कार्यक्रम भी प्रारंभ होंगे।
साफ-सफाई के बाद पड़ेगा चूना
शनिवार
को जन्माष्टमी पर्व को लेकर शहर में साफ-सफाई की खास व्यवस्था रखी जाएगी।
पालिकाध्यक्ष वत्सला अग्रवाल ने बताया कि जन्माष्टमी पर्व पर साफ-सफाई
व्यवस्था उचित रखने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही चूना डलवाने के लिए भी
कहा है। पेयजल की सप्लाई भी निर्धारित समय से ज्यादा करवाई जाएगी।
ऐसे करें पूजन
भगवान
श्रीकृष्ण को दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, चंदन, केसर एवं पंचामृत से स्नान
कराएं। इसके बाद बालकृष्ण का विधि-विधान से पूजन कर अवतरित करें। आरती
उतारकर प्रसाद का वितरण करें।