श्री रामकथा अमृत वर्षा के छठे दिन दशरथ मरण और राम वनवास के प्रसंग की
व्याख्या करते हुए कथा वाचक विजय कौशल महाराज ने कहा कि जो अहंकार को दबाए
रखे वही बुराइयों पर विजय हासिल कर सकता है। सीपी ग्राउंड में चल रही
कथा में खुशगवार धूप के कारण पंडाल श्रोताओं से भरा रहा। दशरथ मरण और राम
के वनवास की लीला के प्रसंग को सुनाते हुए कथा
वाचक विजय कौशल ने कहा दशरथ
ने श्रवण कुमार को अनजाने में मारा था। इसका फल दशरथ को राम वियोग में
प्राण त्यागकर भुगतना पड़ा । राम के वनवास प्रसंग पर कहा कि मनुष्य को अपनी
भाषा, वेश, भोजन कभी नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज माताएं अपने
बच्चों को अंग्रेजियत की आग में झोंक रहीं है।
अंग्रेजी पढ़ाना बुरा नहीं
है पर अपनी संस्कृति, अपनी भाषा को छोड़ना बहुत बुरा है। बच्चों का विकास
स्वाभाविक होना चाहिए। राम अपनी माता या पिता के कहने से नहीं बल्कि स्वयं
के निर्णय से वन गए थे। उन्होंने निशाचर और राक्षस शब्द की व्याख्या करते
हुए कहा कि निशाचर माने जो हमें अंधेरे में रखे और राक्षस माने बुराई। हमें
इन दोनों का ही अंत करने का प्रयास करना चाहिए।
पैसे का अहंकार मनुष्य को
बिगाड़ देता है। हमें अहंकार को छोड़कर बुराई से बचना चाहिए। इस
दौरान चंद्र प्रकाश अग्रवाल, सत्य प्रकाश अग्रवाल, लक्ष्मी नरायन अग्रवाल,
गिरीश चंद्र अग्रवाल, प्रहलाद नरायन अग्रवाल, सत्यनरायन अग्रवाल, अरविंद
अग्रवाल, मिथलेश अग्रवाल,
मोनिका अग्रवाल, जय कुमार अग्रवाल, ऋतु अग्रवाल,
राम प्रकाश यादव कल्लू, योगेश तिवारी, पीरथ, पवन गुप्ता, मनोज कौशल, उमेश
गुप्ता, पियूष अग्रवाल, हरेराम अग्रवाल, रामकुमार अग्रवाल, आदि मौजूद रहे।