फर्रुखाबाद। जीआरपी इंस्पेक्टर हत्याकांड में सिपाही की गवाही के लिए जीआरपी एसओ ने एसपी फर्रुखाबाद को पत्र भेजा है। इसमें सिपाही की मूल तैनाती व गृह जनपद के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है।
पैसेंजर ट्रैन की बोगी में वर्ष 1996 में युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। शव की शिनाख्त जनपद मेरठ (अब बागपत) के थाना अमीनगर सराय के गांव लाहौर सराय निवासी पुलिस इंस्पेक्टर रामनिवास यादव के रूप में की गई थी। मुकदमे में विवेचक के दौरान नेमकुमार बिलइया, अनुपम दुबे, कौशल दुबे आरोपी बनाए गए। 24 जुलाई 1996 को चार्जशीट दाखिल की गई। बाद में नेम कुमार बिलइया की मुठभेड़ में मौत हो गई।
आरोपी कौशल दुबे की भी कई वर्ष पहले मौत हो चुकी है। फतेहगढ़ कोतवाली के मोहल्ला कसरट्टा निवासी बसपा नेता अनुपम दुबे इंस्पेक्टर हत्याकांड में फरार चल रहे थे। उनके कुर्की वारंट जारी हो गए थे। इंस्पेक्टर हत्याकांड में उनको कानपुर कोर्ट में रिमांड पर बुलाया गया। मुकदमे में गवाही के लिए जीआरपी में तैनात तत्कालीन सिपाही आमीन को गवाही के लिए तलाश किया जा रहा है। घटना के दिन सिपाही ट्रेन में सुरक्षा गार्ड की ड्यूटी कर रहा था। उसकी मुकदमे में गवाही होनी है।
इस कारण एसओ जीआरपी ने एसपी अशोक कुमार मीणा को पत्र भेजकर सिपाही आमीन की तैनाती व गृह जनपद के बारे में जानकारी मांगी है। ताकि उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जा सके। इंस्पेक्टर हत्याकांड में तीस अक्तूबर को सुनवाई होनी है।