कानपुर। फर्रुखाबाद निवासी वृद्धा की मंगलवार रात हैलट में उपचार के दौरान मौत हो गई। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद उनका शव ले जाने के लिए उनके भतीजों और पड़ोसी युवक में विवाद हो गया। दरअसल वृद्धा ने 20 साल तक उनकी सेवा करने वाले पड़ोसी युवक को अपनी वसीयत कर दी थी। उनकी मौत की खबर मिलते ही दोनों भतीजे पहुंचे और मरने के बाद अंगूठा लगवाने लगे। यह देखकर अस्पताल के कर्मचारियों ने पुलिस को सूचना दी। हालांकि, पोस्टमार्टम के बाद परिवार वालों ने ही उनका अंतिम संस्कार किया।
फर्रुखाबाद में फतेहगढ़ जेल के पास रहने वाली मुन्नीदेवी (60) के पति रणवीर सिंह जेल में सिपाही थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। चार साल पहले उनके पति का निधन हो गया था। पड़ोस के हाथीखाना मुहल्ले में रहने वाले राकेश पाल ही मुन्नीदेवी की देखरेख करते थे। जिन्हें वह अपने बेटे की तरह मानती थीं। उन्होंने दो माह पहले अपनी संपत्ति की वसीयत भी राकेश पाल को कर दी थी। पिछले माह तबीयत खराब होने के चलते राकेश ने उन्हें हैलट में भर्ती कराया था। जहां आईसीयू में उपचार के दौरान मुन्नीदेवी की मंगलवार देर रात मौत हो गई।
मुन्नी देवी की मौत की जानकारी जब उनके भतीजे प्रेमपाल सिंह चौहान और धर्मवीर सिंह को मिली तो वह कागजात लेकर हैलट हाउस पहुंचे। जहां उन्होंने मुन्नीदेवी का अंगूठा लगवाने का प्रयास किया। यह देखकर वार्ड ब्वाय और कर्मचारियों ने चौकी पुलिस को सूचना दी तो उन्होंने अपनी गलती मानी। इसके बाद बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद भतीजों ने शव ले जाने को कहा तो राकेश पाल ने कहा कि मुन्नी देवी की तबीयत खराब होने के बाद कोई उनका हालचाल लेने तक नहीं आया। अब प्रापर्टी की बात सामने आई तो वह शव ले जाना चाहते थे। इस पर दोनों पक्षों में विवाद हो गया। हालांकि, बाद में राकेश पाल ने कोई आपत्ति नहीं जताई। जिसके बाद मुन्नीदेवी का शव पुलिस ने उनके भतीजों के सुपुर्द कर दिया।वहीं इस संबंध में चौकी प्रभारी इंदुकांत पांडेय ने बताया कि दोनों भतीजों ने अपनी गलती मान ली थी जिसके बाद शव उन्हें सौंप दिया गया।