फर्रुखाबाद। गैंगस्टर एक्ट के पांच अपराधियों पर 29 साल तक चली सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने दोषी ठहराया। प्रत्येक को तीन-तीन साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। मुकदमे की सुनवाई के दौरान दो आरोपियों की मौत हो चुकी है, जबकि एक की फाइल पृथक कर दी गई।
मऊदरवाजा के तत्कालीन थानाध्यक्ष चन्द्रधर गौड़ ने 20 फरवरी 1996 को थाना क्षेत्र के गांव सिठऊपुर निवासी अमर सिंह, आदर्श पाल सिंह, सूरजपाल सिंह, रघुवीर सिंह, विजय सिंह, रामनाथ, विश्वनाथ सिंह, राम विलास के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें कहा कि गैंग लीडर अमर सिंह अपने गिरोह के सदस्यों के साथ मिलकर क्षेत्र में रंगदारी, वसूली, मारपीट आदि घटनाओं को अंजाम देता है। अमर सिंह के खिलाफ अलग-अलग थानों में दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। क्षेत्र में इनके खिलाफ ग्रामीण गवाही देने से भी डरते हैं। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच की।
विवेचक ने विवेचना पूरी कर सभी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई के दौरान रामनाथ व विश्वनाथ सिंह की मौत हो गई, जबकि राम विलास की फाइल पृथक कर दी गई। मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट रितिका त्यागी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। गवाह व साक्ष्य के आधार पर अमर सिंह, आदर्श पाल सिंह, सूरज पाल सिंह, रघुवीर सिंह, विजय सिंह को दोषी ठहराया। प्रत्येक को तीन-तीन साल कठोर कारावास व पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।