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Farrukhabad News: सेंट्रल जेल की खाली बैरक में कैदी ने फंदे से लटककर दी जान

Sat, 14 Feb 2026 01:27 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
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फोटो-16 प्रभात उर्फ प्रभाकर। फाइल फोटो
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फर्रुखाबाद। फतेहगढ़ स्थित सेंट्रल जेल में दुष्कर्म के आरोप में सजा काट रहे कैदी ने शुक्रवार दोपहर खाली बैरक में अंगोछे से फंदा लगाकर जान दे दी। वह जेल में दरी बनाने का काम करता था। उसे अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
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मेरापुर थाना क्षेत्र के गांव सिलसंडा निवासी प्रभात उर्फ प्रभाकर(40) ने 25 जून 2023 को किशोरी से दुष्कर्म किया था। गांव के ही हरवेंद्र सिंह ने घटना का वीडियो बनाकर वायरल कर दिया था। इस पर 26 जून 2023 को उसके खिलाफ पाक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान दोषी पाए जाने पर उसे 24 फरवरी 2024 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। 24 मार्च 2024 को उसे सेंट्रल जेल भेजा गया था। जेल में वह दरी कारखाने में दरी बनाने का काम करता था। उसकी पत्नी भावना अपने दो बेटों के साथ गांव में रहती है।
कैदी प्रभात उर्फ प्रभाकर को सेंट्रल जेल में कमान में काम पर लगाया गया था। दोपहर करीब तीन बजे उसने दरी कारखाने के पास पुरानी खाली पड़ी बैरक में जाकर लोहे के पाइप में अंगोछे से फंदा लगाकर लटक गया। जानकारी पर उसे आनन-फानन जेल कर्मियों ने फंदे से उतारा और हालात गंभीर होने से जेल अस्पताल से उसे तत्काल लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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सूत्रों की मानें तो कैदी कुछ जेल कर्मियों के उत्पीड़न से परेशान रहता था। यह भी पता चला है कि जब कैदी को फंदे से उतारा गया, उसी दौरान उसकी मौत हो चुकी थी। सेंट्रल जेल अधीक्षक आशीष तिवारी ने बताया कि फंदे से उतारने के दौरान कैदी जीवित था। उसका जेल अस्पताल में उपचार किया गया तो ऑक्सीजन लेबल बढ़कर 93 तक पहुंच गया था। पल्स कम होने से उसे लोहिया अस्पताल के लिए रेफर किया गया। वहां उसे मृत घोषित किया गया। शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि ड्यूटी पर लगे बंदी रक्षक या कर्मचारी की प्रथम दृष्टया लापरवाही प्रतीत होती है। इसकी जांच कराई जाएगी। दोषी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई होगी।

एक दिन पहले ही मां व पत्नी से फोन पर हुई थी बात
सेंट्रल जेल के अधीक्षक आशीष तिवारी ने बताया कि आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी प्रभात उर्फ प्रभाकर की 12 फरवरी को ही फोन पर पत्नी व मां से बात कराई गई थी। उसने सामान्य तौर पर बात की, कोई परेशानी भी नहीं बताई थी। इससे पहले 10 फरवरी, सात फरवरी व तीन फरवरी को भी मां व पत्नी से फोन पर बात की थी। छह फरवरी को उसकी मां ने जेल आकर मुलाकात भी की। घटना से पहले कैदी का जेल के किसी कर्मचारी से कोई विवाद भी नहीं हुआ तो उत्पीड़न करने का कोई औचित्य ही नहीं। हालांकि जेल में कैदी के फंदे पर लटकने की घटना में ड्यूटी पर लगे कर्मचारियों की प्रथम दृष्टया लापरवाही तो लग रही है। इसके लिए जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
जेल में काम अधिक लिए जाने से था परेशान

संकिसा। जेल में कैदी प्रभात उर्फ प्रभाकर की फंदे से लटककर मौत की जानकारी मिलते ही गांव सिलसंडा में परिजन बिलखने लगे। देर शाम वह लोहिया अस्पताल पहुंच गए। प्रभात अपने तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। उससे छोटा भाई सुधाकर व अरविंद राजपूत है। इसके अलावा घर पर मां कमला देवी, पत्नी कल्पना, तीन बच्चों में बड़ी बेटी दिव्यांशी(9), अंशिका (ढाई वर्ष) व पुत्र आयुष (5) है। कैदी के पारिवारिक चाचा रन सिंह ने बताया कि प्रभात जेल में परेशान रहता है। उससे शौचालय व नाली साफ कराई जाती है। कुछ दिन पहले वह मिलाई करने गए थे। तब वह कह रहा था कि जल्दी उसे पेरोल पर निकाल लो। जेल में उससे बहुत काम लिया जाता है। पेरोल के लिए न्यायालय में अपील भी की जा चुकी थी। (संवाद)
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