कमालगंज। गौरी पुत्र गणेश की विदाई में भारी बारिश भी भक्तों की अटूट श्रद्धा को नहीं डिगा पाई। तेज बौछारों के बीच शुरू हुई मूर्ति विसर्जन अनुष्ठान की यात्रा में जमकर अबीर-गुलाल उड़ा। डीजे की धुन पर नाचते-गाते और जयकारे लगाते भक्तों ने कस्बे में डेढ़ किलोमीटर की दूरी चार घंटे में तय की। यहां से 20 किलोमीटर चल कर पांचालघाट पर विधिविधान से विसर्जन हुआ।
सुबह होते ही तेज बारिश शुरू हो गई लेकिन, भक्तों को कहां इसकी परवाह। मन में गुनगुनाते-चलो बुलावा आया है, गणपति ने बुलाया है... की धुन के साथ घर से निकल पड़े। कोई गणपति महोत्सव स्थल पर पहुंच रहा था तो कोई दीप केसरी माता मंदिर के पास विसर्जन यात्रा के आरंभ स्थल पर।
नौ बजे के बाद कमालगंज के महाराजा की विसर्जन शोभायात्रा आगे बढ़ी तो चंदन का लेप लगाए भक्तों की भीड़ बप्पा के जयकारों के साथ उछल पड़ी। आधा किलोमीटर चलकर रेलवे तिराहे तक यात्रा के पहुंचते-पहुंचते मूर्ति विसर्जन अनुष्ठान आस्था के जनसमुद्र में बदल गई। डीजे के पीछे अबीर-गुलाल उड़ाते, भजनों पर झूमते-उछलते, नृत्य करते, भगवा ध्वज लहराते भक्तों का उत्साह देखते बन रहा था।
कई भक्त छोटे बच्चों को कंधे पर बैठाए थे और बच्चे कंधे पर नृत्य की मुद्रा में झूम रहे थे। मैनपुरी व कन्नौज से आए डीजे के पीछे ज्यादा भीड़ थी। छतों से भी लोग श्रीहरि भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप को समर्पित अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन अनुष्ठान यात्रा वैभव के साक्षी बन रहे थे। दुकानों की पटियों पर भी लोग जमा थे। भगवा ध्वजों के साथ कुछ युवा तिरंगा लिए भारत माता का जयघोष कर रहे थे।
महिलाओं की आस्था, संकल्प और समर्पण से अलौकिक नजारा
-महाराजा के रथ के आगे आधी आबादी का जयघोष गूंज रहा था। महिला भक्तों का सैलाब इतना था कि ओर-छोर भी नहीं दिख रहा। बरसते पानी की परवाह किए बिना महिला भक्तों की आस्था, संकल्प और समर्पण से नजारा अलौकिक बन गया। बप्पा के भजनों पर दोनों हाथ ऊपर उठाकर भक्ति का जश्न अनोखे अंदाज में मनाया जा रहा था। अबीर-गुलाल की भी बौछार होती रही।
गणपति का वैभव, रथ से महाप्रसादी पाने की होड़
- सबसे पीछे रथ पर विराजमान गणपति का वैभव दमक रहा था। सभी अंतिम दर्शन की अभिलाषा लिए थे। गणपति भी मानो सभी को आशीष देते चल रहे थे। रथ से गोपाल विश्नोई, राकेश गुप्ता, चंदन गुप्ता आदि महाप्रसादी का वितरण कर रहे थे। अध्यक्ष अमित गुप्ता, नन्हीं पंडित, पंकज गुप्ता, अनूप गुप्ता, गोपाल पालीवाल, नितेश माहेश्वरी, सदन दुबे, राघव शुक्ला, सौरभ चौरसिया, महेंद्र पाठक, नित्यप्रकाश, मनोज हलवाई, दिलीप गुप्ता, प्रतीक हलवाई, रवि गुप्ता, सतीश माहौर, अनुभव आदि भी रहे।
भोजपुर, याकूतगंज, फतेहगढ़, भोलेपुर व नेकपुर में भव्य स्वागत
- यात्रा के कमालगंज से आगे निकलने पर बारिश और तेज हो गई। वहीं, भोजपुर में मेजर एसडी सिंह यूनिवर्सिटी के बाहर छात्र-छात्राओं ने स्वागत किया। याकूतगंज, फतेहगढ़, भोलेपुर, नेकपुर में भी स्वागत हुआ, यहां भी भंडारे चले।
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बारिश में भी नहीं थमा भक्तों का उत्साह
फोटो-24 बारिश के बीच निकली गणेश विसर्जन यात्रा में शामिल महिलाएं। संवाद
कायमगंज। विभिन्न स्थानों पर स्थापित करीब तीन दर्जन गणेश प्रतिमाएं यात्रा में शामिल हुईं। घरों में स्थापित प्रतिमाओं को भी श्रद्धालु विसर्जन के लिए लेकर निकले। यात्रा गल्ला मंडी, गंगा दरवाजा, मुख्य चौराहा, लोहाई बाजार, श्यामा गेट, बजरिया और तहसील रोड होते हुए ढाईघाट शमसाबाद पहुंची। यहां अधिकांश प्रतिमाओं का भू-विसर्जन किया गया, जबकि कुछ का गंगा में विसर्जन किया गया। कई स्थानों पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया।
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शमसाबाद में 22 फीट ऊंची मटकी फोड़ने में सात टीमों ने दिखाया दम
फोटो-25 शमसाबाद ढाई घाट रोड पर मुख्य बाजार में मटकी फोड़ के दौरान लगी श्रद्धालुओं भीड़। संवाद
फोटो-26 शमसाबाद ढाई घाट रोड पर मुख्य बाजार में मटकी फोड़ के दौरान रस्सी से लटका युवक। संवाद
शमसाबाद। मोहल्ला गुमटी से शुक्रवार को सिद्ध विनायक कमेटी के अध्यक्ष गौरव सक्सेना के नेतृत्व में शोभायात्रा निकाली गई। सिद्धि विनायक कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों ने भाग लिया। शोभायात्रा कस्बा के बाजार कला, बाजार मंडी और थाना चौराहे से होते हुए मोहल्ला दलमीर खां पहुंची।
दलमीर खां में ढाई घाट मुख्य मार्ग पर मटकी फोड़ कार्यक्रम हुआ। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े। दुकानों और घरों की छतों के साथ ही मुख्य मार्ग पर भी लोगों की भीड़ जमा रही। थानाध्यक्ष सचिन चौधरी पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहे। पूर्व चेयरमैन विजय गुप्ता और संजय गंगवार भी रहे। मुख्य मार्ग पर 22 फीट की ऊंचाई पर रस्सी के सहारे मटकी बांधी गई। मटकी फोड़ने के लिए सात टीमों ने हिस्सा लिया।
दोपहर में करीब एक घंटे तक सभी टीमों ने मटकी फोड़ने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद कमेटी के अध्यक्ष गौरव सक्सेना जेसीबी की मदद से ऊंचाई तक पहुंचे और मटकी फोड़कर कार्यक्रम का समापन किया। इसके बाद गणेश जी की प्रतिमा के साथ शोभायात्रा ढाई घाट के लिए रवाना हुई। वहां प्रतिमा को विसर्जित किया गया।