फर्रुखाबाद। ग्राम सभा जसमई की दरगाह नूरिया में हजरत नूरूल्लाहशाह के कुल व फातिहा के वक्त भारी भीड़ उमड़ी। अकीदतमंदों ने मजार पर फूल-मालाएं चढ़ाईं। सज्जादा नशीन ने मुल्क की तरक्की व खुशहाली की दुआ मांगी। इससे पहले यहां जलसा सीरत-ए-मुस्तफा का आयोजन किया गया।
सूफी संत हजरत नूरूल्लाह शाह की दरगाह पर सुबह से शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के मुरीदों और अकीदतमंदों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। मजार पर कुरआन की तिलावत कर अकीदत के फूल चढ़ाए गए। इससे पहले दरगाह प्रांगण में आयोजित जलसा-ए-मुस्तफा सीरत में मौलाना एजाज अहमद नूरी ने कहा कि अल्लाह के रसूल रहमत बन दुनिया में आए। उनकी जिंदगी का हर पहलू इंसानियत की भलाई का सबक सिखाता है। विडंबना है कि उनकी शिक्षाओं पर उस तरह अमल नहीं किया जा रहा, जितनी मौजूदा दौर की जरूरत है।
मौलाना ने कहा सूफी-संतों ने भी पैगंबरे इस्लाम की शिक्षाओं पर खुद भी अमल किया और अपने मुरीदों को इंसानियत का सबक दिया है। आफताब कादरी, सरताज मुजीबी ने नात पेश की। सज्जादा नशीन फुरकान अहमद नूरी ने शिजरा पढ़ा और मुल्क की तरक्की व खुशहाली की दुआ मांगी। हाजी अल्लाह बंदे, डाक्टर इबादुल्लाह, मिर्जा कलीम बेग, अब्दुल मुईद अफ्रीदी, मोहम्मद ताहिर खां, शकील खां, पृथ्वीनरायन, सईद, जाकिर, कल्लू, मुन्ना खां, सुहेल खां आदि मौजूद रहे।