फर्रुखाबाद। डा. राममनोहर लोहिया अस्पताल में चादरें धोने के लिए खरीदी गई मशीन खराब है। इसे सही कराने के प्रयास व्यर्थ गए। चादराें को एक साथ हौज में धोया और जमीन पर सुखाया जाता है। सर्दी में चादरों के जल्द न सूखने से यह सभी मरीजाें को नसीब नहीं हो पा रही हैं।
मरीजों को संक्रमण से बचाने और चादरों के जल्द से जल्द सुखाने के लिए लोहिया अस्पताल प्रशासन की ओर से 30 मार्च 2007 को 4 लाख 87 हजार 585 रुपये में वाश्ंिाग मशीन खरीदी गई थी। इससे नवंबर 2010 तक धुलाई होती रही। इसी साल दिसंबर में यह खराब हो गई। तब से आपरेशन थियेटर के कपड़ों से लेकर अस्पताल की चादरों तक को एक साथ हौज में धोया और सुखाया जा रहा है। इन पर धूल व गंदगी पड़ती रहती है। इन चादराें को बेड पर बिछा दिया जाता है। चादरों की धुलाई के लिए अस्पताल प्रशासन ने दो कर्मचारियों को लगाया गया है। इससे सभी चादरें नहीं धुल पातीं। सर्दी में इनके सूखने की भी समस्या है।
मरीजाें का दर्द बेशुमार
अस्पताल में भर्ती ज्योति पुत्री रामतीर्थ निवासी कुड़का थाना बेवर जिला मैनपुरी के साथ में रह रही बुआ गुड्डीदेवी ने बताया करीब 13 दिन पहले मरीज को भर्ती कराया था। तीन चार दिन बाद चादर तब बदलती है जब वह खुद ही जाकर लेती हैं। चक्रपाल निवासी अदमापुर थाना तालग्राम जिला कन्नौज के साथ आए रिश्तेदार अतिम ने बताया कि मरीज को 25 तारीख को भर्ती कराया था। तब से वही चादर बिछी है। नन्हीं देवी पत्नी रामप्रकाश निवासी चौरसिया मझोला थाना मऊदरवाजा ने बताया कि वह 12 दिन पहले भर्ती हुई थीं। चादर मांगने पर ही मिलती है। मरीज धुन्नी पुत्र अखिलेश निवासी सुतिहार थाना शमसाबाद के साथ आईं उसकी नानी गंगा देवी ने बताया कि मरीज की चादर तीन दिनों से नहीं बदली गई है।
वर्जन
वाशिंग मशीन खराब है। इसके भुगतान का भी कुछ मामला है। जिस कंपनी से इसको खरीदा गया था, वह चली गई। गारंटी के लिए 10 प्रतिशत रुपया रोका गया था। इसको सही करने के लिए मिस्त्री को बुलाया था, लेकिन कोई भी मिस्त्री सही नहीं कर पा रहा है।- डा. बीबी पुष्कर, कार्यवाहक सीएमएस