कायमगंज। नारी प्रधान देश में नारियों के असम्मान से संस्कृति का हृास हो रहा है और कल तक भारतीय संस्कृति का लोहा मानने वाले देश उपहास कर रहे हैं।
मानस मंच के तत्वावधान में गायत्री धाम शिवाला भवन में चल रहे 34 वें मानस सम्मेलन के दूसरे दिन दतिया मध्य प्रदेश से आईं कथा वाचक साध्वी लीला भारती ने कहा कि इस देश में आदि काल से नारियों का सम्मान होता आया है सीता, सावित्री, दुर्गा के कारण ही इस देश को नारी प्रधान देश कहा जाता है। उन्होंने कहा कि जिस घर में नारी का सम्मान होता है वहां लक्ष्मी निवास करती है। हमारे देश में आज नारी का असम्मान हो रहा है। जिसके लिए हम स्वयं दोषी हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर तो हमारे देश में साल में दो बार लोग श्रद्धा से नवरात्र मनाते हैं और वहीं कन्या भ्रूण हत्या करने पर उतारू हो जाते हैं।
झांसी से आए कथा वाचक पंडित अरुण कुमार रामायणी ने कहा कि मनुष्य की सांसारिक वस्तुओं की भूख कभी शांत नहीं होती। सांसारिक वस्तुओं की प्राप्ती के लिए मनुष्य को ज्यादा परिश्रम की भी आवश्यकता नहीं होती जबकि यश, धर्म और पुण्य उसे त्याग से ही प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि रामकथा कराने भर से मनुष्य का कल्याण संभव नहीं है बल्कि उसे अपने जीवन में उतारने और उस पर अमल करने से मनुष्य का कल्याण संभव है। इस दौरान प्रमुख रूप से सत्यप्रकाश अग्रवाल, प्रहलाद नरायन अग्रवाल, पवन गुप्ता, मनोज कौशल, सुधाकर दुबे, सत्य प्रकाश अग्रवाल, वेद प्रकाश अग्रवाल, गोपाल रस्तोगी, रमाशंकर शुक्ला, प्रमोद तिवारी, डा. एमपी सिंह आदि मौजूद रहे। मंच संचालन रामकृष्ण त्रिवेदी ने किया।