फर्रुखाबाद। जननी सुरक्षा योजना के तहत जिले में 917 प्रसूताओं को लाभ नहीं मिल सका है। भुगतान के लिए चक्कर लगवाए जा रहे हैं। अधिकतर सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं को न तो भोजन दिया जाता है और न ही नाश्ता। इससे सरकार की महत्वाकांक्षी योजना लापरवाही का शिकार होते दिख रही है।
महिलाओं को सुरक्षित प्रसव कराने के लिए सरकार जननी सुरक्षा योजना चला रही है। योजना के तहत सरकारी अस्पताल में निशुल्क प्रसव कराने के साथ 48 से 72 घंटे तक भर्ती रखने के आदेश हैं। इस दौरान प्रसूता को अस्पताल से निशुल्क नाश्ता व भोजन देने की व्यवस्था है। छुट्टी करने के दौरान लाभार्थी के खाते में अनुदान राशि भेजने के आदेश हैं। इसमें शहर की निवासी प्रसूता को 1000 रुपये व ग्रामीण क्षेत्र की लाभार्थी को 1400 रुपये देने का प्रावधान है।
अस्पताल से मिलने वाली धनराशि का मकसद प्रसव के बाद प्रसूता को घर पर पौष्टिक आहार देना है। हालात यह हैं कि अधिकतर सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं को न तो भोजन मिल पाता है और न ही नाश्ता। खास बात तो यह है कि कई प्रसूताओं की तो 24 घंटे में ही अस्पताल से छुट्टी कर दी जाती है। फिर उन्हें जननी सुरक्षा योजना की धनराशि के लिए अस्पताल से लेकर अधिकारियों तक के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
विभागीय रिकार्ड के अनुसार एक अप्रैल से दिसंबर तक जिले के सरकारी अस्पतालों में 17905 प्रसव कराए गए। इसमें 1538 महिलाएं शहर की व 16367 प्रसूता ग्रामीण क्षेत्र की हैं। जबकि जिले का 31 मार्च तक 26608 महिलाओं का प्रसव सरकारी अस्पताल में कराने का लक्ष्य निर्धारित है।
भुगतान की यह है स्थिति
जनपद के सरकारी अस्पतालों में दिसंबर तक शहर क्षेत्र की 1538 महिलाओं के प्रसव कराए गए। इनमें 1002 प्रसूताओं को 1000 रुपये के हिसाब से 10 लाख दो हजार रुपये भुगतान किया। 536 प्रसूताओं को योजना का लाभ नहीं मिल सका है। ग्रामीण क्षेत्र की 16,367 प्रसूताओं में 15,986 प्रसूताओं को 1400 के हिसाब से दो करोड़ 23 लाख 80 हजार 400 रुपये भुगतान किया गया। अभी 381 प्रसूता लाभ से वंचित हैं। जबकि आशाओं को पूरा भुगतान कर दिया गया।
मांगा जाएगा स्पष्टीकरण
एनएचएम के नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ.दलवीर सिंह ने बताया कि यह सीएचसी प्रभारियों की लापरवाही है। इस संबंध में सीएचसी प्रभारियों व जिला मातृ स्वास्थ्य सलाहकार से स्पष्टीकरण तलब करने के साथ शीघ्र ही भुगतान कराने का प्रयास किया जाएगा। सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि सीएचसी प्रभारियों को चेतावनी दी गई है। उन्हें निर्देश दिए गए कि पहले प्रसूता का भुगतान होने के बाद ही आशाओं का भुगतान किया जाएगा।