ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों में भ्रष्टाचार रोकने व पारदर्शिता लाने के लिए प्रधान व सेक्रेटरी के डिजिटल हस्ताक्षर वाले डोंगल बनवाए गए हैं। विकास खंड की 118 ग्राम पंचायतों में से 93 के डोंगल अभी तक पोर्टल पर रजिस्टर्ड ही नहीं हो सके।
जबकि जिन ग्राम पंचायतों में डोंगल रजिस्टर्ड होकर ऑनलाइन भुगतान किए भी गए, उनका पैसा भी तकनीकी कारणों से स्थानांतरित नहीं हुआ। नई व्यवस्था के चलते फिलहाल पिछले ढाई माह से विकास कार्य लटके हैं।
14 वें वित्त आयोग से 2019-20 की प्रथम किस्त के रूप में विकास खंड की 118 ग्राम पंचायतों के खाते में 9.45 करोड़ रुपये 25 जुलाई को भेजे गए थे। इसके तुरंत बाद खातों से भुगतान पर रोक लगाकर भुगतान की ऑनलाइन व्यवस्था के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए थे।
इसके लिए ग्राम प्रधान व सचिव के डिजिटल हस्ताक्षर के लिए डोंगल बनवाए गए। डोंगल को पोर्टल पर रजिस्टर्ड कराया जाना था। अप्रैल 2019 से जुलाई तक के बिल वाउचर अपलोड करने थे। उसके बाद ही नए कार्यों के भुगतान डोंगल के माध्यम से हो सकते हैं। कई ग्राम पंचायतों में पुराने बिल वाउचर में खेल के कारण मामला फंसा रहा।
यही कारण है कि अभी तक 118 में केवल 25 ग्राम पंचायतों में ही यह प्रक्रिया पूरी हो पाई है। वहीं, खंड विकास अधिकारी राजेश बघेल का कहना है कि 25 ग्राम पंचायतों में प्रक्रिया पूरी हो जाने के साथ ही 23 ग्राम पंचायत ऐसी हैं कि उनके भी डिजिटल हस्ताक्षर रजिस्टर्ड हो गए हैं। इन 23 ग्राम पंचायतों के डाटा का सत्यापन ही शेष बचा है।
जिन पंचायतों के डोंगल रजिस्टर्ड नहीं हो पाए, वहां रजिस्टर्ड किए जाने की कार्रवाई शीघ्र पूरी कराई जाएगी। बलीपुर ग्राम पंचायत खाते से हैंडपंप मरम्मत का पैसा डोंगल के माध्यम से एक सप्ताह पूर्व स्थानांतरित किया गया था। लेकिन अभी तक साफ्टवेयर में पेंडिंग लिखकर आ रहा है। यही स्थिति कतरौली पट्टी ग्राम पंचायत की है।