फोटो-04, आवास विकास स्थित उप्र ग्रामीण बैंक का क्षेत्रीय कार्यालय ।संवाद
फर्रुखाबाद। प्रदेश में तीन बैंकों के अधीन चल रही ग्रामीण बैंकों का एकीकरण करना जिले की 58 शाखाओं के 80 हजार खाताधारकों के लिए मुसीबत बन गया।
आधार कार्ड व एटीएम से लेनदेन, ऋण समेत कई सेवाएं अभी भी बाधित चल रही हैं। जिले की ग्रामीण बैंक का संचालन अभी तक बैंक ऑफ इंडिया करती थी, मगर अब पूर्ण बैंक का दर्जा मिल गया है।
प्रदेश के पश्चिम में सर्वयूपी ग्रामीण बैंक, मध्य में आर्यावर्त ग्रामीण बैंक और पूर्वांचल में प्रथमा ग्रामीण बैंक के नाम से ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं दी जाती थीं। इनका संचालन तीन अलग-अलग राष्ट्रीयकृत बैंकें करती थीं। पिछले महीने प्रदेश की तीनों बैंकों का एकीकरण कर दिया गया। पूर्ण बैंक का दर्जा मिलने के बाद उप्र ग्रामीण बैंक नाम हो गया। जब ग्रामीण बैंक का एकीकरण शुरू हुआ, तो ग्राहकों के सामने मुसीबत बन गया।
सितंबर में खातों में लेनदेन समेत अधिकांश कार्य प्रभावित रहे। पिछले सप्ताह काफी कुछ सुधार हुआ, मगर जिले की 58 शाखाओं में करीब 80 हजार खाताधारक अभी भी मुसीबत में फंसे हुए हैं। त्योहारी सीजन पर ग्रामीण परेशान हैं।
10 फीसदी बची दिक्कतें जल्द दूर होंगी
आवास विकास क्षेत्रीय कार्यालय के वरिष्ठ प्रबंधक अमित भट्ट कहते हैं कि एकीकरण करना बड़ा काम था। पूरी तरह बैंक बंद नहीं कर सकते। लिहाजा ग्राहकों के काम के साथ अपना नेटवर्क शुरू किया जा रहा है। छह अक्तूबर से 90 फीसदी सेवाएं शुरू कर दी गई हैं। एटीएम, आधार कार्ड से लेनदेन, ऋण समेत बमुश्किल 10 फीसदी बची दिक्कतें भी चंद दिनों दूर हो जाएंगी।