धीमरनगला गांव में गंगा में मिल रहा गंदा नाला।
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शहर के तीनों नालेे गंगा में गिराने पानी पूरी तरह से काला पड़ गया है। 40 फीसदी प्रदूषित पानी में अमावस्या पर श्रद्घालुओं ने स्नान किया और पहनावन भी चढ़ाई।
टोकाघाट नाले के माध्यम से शहर भर का मल-मूत्र गंगा में मिलाया जा रहा है। अभी हाल ही में किए गए एक सर्वे में गंगा प्रदूषण नियंत्रण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रजकिशोर मिश्र ने नमानि गंगे योजना के तहत उमा भारती को अवगत कराया था।
इसके बाद भी गंदे नालों का गंगा में रोकना बंद नहीं किया गया। इस संबंध में पालिकाध्यक्ष वत्सला अग्रवाल का कहना है कि नालों को टेप कराने के लिए शासन को लिखा जा चुका है। उनके स्तर से यहां कोई काम नहीं हो सकता। नाले को बंद कराने का काम भी केंद्र सरकार का है।
नगर मजिस्ट्रेट शिवबहादुर सिंह ने बताया कि इस संबंध में जिला प्रशासन की ओर से भी लिखा जा चुका है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। गंगा प्रदूषण का प्रमुख कारण यह भी है कि गंगा के किनारे शवों को भी जलाया जाता है। इस वजह से गंगा में और प्रदूषण बढ़ रहा है।