फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय में बने आवासों में 35 लोगों का अवैध कब्जा है। इनमें कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारी रह रहे हैं तो कुछ कर्मियों ने अपनी कोठियां बनवाकर सरकारी आवासों में रिश्तेदारों को रख दिया है। अवैध रूप से काबिज होने के पीछे जिम्मेदारों की शह बताई जा रही है।
लोहिया पुरुष और महिला अस्पताल के डॉक्टर, पैरामेडिकल, चतुर्थ श्रेणी स्टाफ के लिए परिसर में 158 आवास बने हैं। अस्पताल के रिकार्ड में 123 कर्मियों को आवास आवंटित हैं, जबकि आवास कोई भी खाली नहीं है। इससे साफ है कि 35 आवासों पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है।
लंबे समय से यहीं नौकरी करने वाले तमाम कर्मचारियों ने अपनी कोठियां बनवा ली हैं। उनका परिवार और खुद उसी में रह रहे हैं, लेकिन आवंटित आवास को खाली नहीं किया। इन आवासों में अपने रिश्तेदारों को बसा दिया है।
कुछ ऐसे कर्मचारी हैं जो कई साल पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं, मगर आवासों पर आज भी काबिज हैं। हद तो यह है कि कुछ पहुंच वाले कर्मचारी वर्षों पहले गैरजनपद स्थानांतरित हो चुके हैं, परिवार इन्हीं आवासों में रह रहा है। इन आवासों को कब्जामुक्त न कराने के पीछे अस्पताल के ही कुछ जिम्मेदारों की शह है।
अस्पताल में इंटर्नशिप करने वाले छात्रों के लिए एक हॉस्टल है। इसके खुले हिस्से में कबाड़ भरा है, जबकि आवासों में कुछ कर्मचारी और कुछ संविदा कर्मी रह रहे हैं। इनमें सभी नौ आवासों पर कब्जा है। लिहाजा इन्टर्नशिप करने वाले छात्र-छात्राओं को दूरदराज घरों से आना-जाना पड़ता है, अथवा किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं।
आवासों में रह रहे लोग बिजली का निर्धारित बिल भी जमा नहीं कर रहे हैं। जबकि 50 से अधिक ऐसे आवास हैं, जिनमें कर्मचारी एसी का इस्तेमाल करके प्रतिमाह हजारों रुपये की बिजली जला रहे हैं। इससे शासन को चूना लग रहा है।
‘जो लोग अवैध रूप से काबिज हैं। उन पर शिकंजा कसने पर झूठी शिकायतें करते हैं। डॉ. श्रेय खंडूजा आवासों का लेखाजोखा बना रहे हैं। कई मकानों पर लोग अवैध रूप से काबिज हैं। उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया जाएगा। बिजली मीटर भी कुछ ही महीनों में अलग लग जाएंगे।’-डॉ. राजकुमार गुप्त, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।