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परिषदीय स्कूल को हाईटेक बना रहे गुरुजी

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अमृतपुर (फर्रुखाबाद)। परिषदीय स्कूलों के बच्चों को प्राइवेट स्कूलों तरह गुरुजी हाईटेक शिक्षा देने का प्रयास कर रहे हैं। बच्चों को लैपटॉप से प्रशिक्षण दिया जा रहा है वहीं तरह-तरह के मॉडल के माध्यम से बच्चों को सहजता से पढ़ाया जा रहा है। बच्चों की रुचि को देखते हुए पढ़ाई के साथ ही खेलकूद पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिसका नतीजा है कि स्कूल में करीब 80 फीसदी बच्चों की हाजिरी दिखाई दे रहे हैं।
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प्राथमिक विद्यालय गौटिया वर्ष 2012 तक बदहाल था। इसके चलते बच्चे भी स्कूल नहीं जाते थे। वर्ष 2013 में प्रधानाध्यापक नागेंद्र सिंह राठौर की वहां तैनाती हुई। इसके बाद से स्कूल की सूरत ही बदलनी शुरू हो गई। अब इस स्कूल में 139 बच्चे पंजीकृत हैं। 100-120 बच्चे प्रतिदिन स्कूल पहुंचते हैं। जो बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं। उनके घर प्रधानाध्यापक खुद पहुंच जाते हैं। वह अभिभावक से बात कर बच्चे को स्कूल ले आते हैं। बच्चों को स्कूल आने में डर न लगे। इससे वह बच्चों को खेल खेल में भी शिक्षा देते हैं। साथ विभिन्न मॉडलों के माध्यम से भी बच्चों पढ़ाते हैं। छोटे बच्चों को अक्षर ज्ञान आसानी से हो जाए, इसके लिए बड़ी फ्लैक्स पर अक्षर छपवाए हैं। उन पर खड़ाकर बच्चों को अक्षर ज्ञान कराते हैं। सर्दी से बचने को अपने धन से बच्चों को टोपी देते हैं। इसके अलावा उन्हें शिक्षण सामग्री पेंसिल, कापी व किताबों की व्यवस्था अपने धन से कराते हैं।

सात माह पूर्व उन्होंने बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा देने ठानी तो वह एक लैपटॉप खरीद लाए। उससे वह कक्षा चार व पांच के बच्चों को कंप्यूटर की बेसिक शिक्षा के साथ ही तरह-तहर की जानकारियां देते हैं। स्कूल के प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापक आकांक्षा अग्निहोत्री व शिक्षा मित्र पूनम देवी की मेहनत से बच्चों के अभिभावक भी खुश हैं। नागेंद्र कहते हैं कि उन्हें बच्चों को प्राइवेट स्कूल की तरह ही परिषदीय स्कूल में शिक्षा देने का प्रयास हो रहा है।
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सुधरी है शिक्षा की हालत
गांव के भंवर पाल कहते हैं जबसे इस विद्यालय में प्रधानाध्यापक नागेंद्र सिंह की तैनाती हुई है, तब से शिक्षा की हालत में काफी सुधार हुआ है। बच्चे यदि स्कूल नहीं जाते हैं तो प्रधानाध्यापक खुद घर पर बुलाने पहुंच जाते हैं। इंद्रपाल सिंह ने बताया कि खेल-खेल में पढ़ाने से बच्चों को भी स्कूल जाने में डर नहीं लगता है। बच्चों के लिए स्कूल में कैरम बोर्ड आदि की भी व्यवस्था की गई है। प्रधान रामस्वरूप ने बताया कि प्रधानाध्यापक ने स्कूल को काफी सुधारा है। तभी बच्चों की उपस्थिति भी ठीक रहती है। प्रधानाध्यापक ने स्कूूल का सुंदरीकरण कराया है। इसे वह और बेहतर कराने का काम करेंगे।
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