फर्रुखाबाद। स्वास्थ्य विभाग की हालत गंभीर हैं। सीएचसी में महिला डॉक्टरों का टोटा है। एक-दो सीएचसी में महिला डॉक्टर तैनात भी हैं तो वह सही से ड्यूटी नहीं करती हैं। इससे लोहिया अस्पताल पर मरीजों का दबाव बढ़ रहा है।
जनपद में नौ सीएचसी हैं। इसमें नगरीय क्षेत्र में दो कायमगंज व फतेहगढ़ स्थित कैप्टन कौशलेंद्र हैं। इसके अलावा सात सीएचसी कंपिल, शमसाबाद, नवाबगंज, मोहम्मदाबाद, बरौन, राजेपुर और कमालगंज हैं। शमसाबाद और नवाबगंज सीएचसी पर महिला डॉक्टर तैनात हैं। अन्य जगह स्टाफ नर्स और एएनएम के भरोसे ही काम चल रहा है। यही कारण है कि सीएचसी से तुरंत ही मरीजों को लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। इससे लोहिया अस्पताल पर लगातार लोड बढ़ता जा रहा है। आलम यह है कि लोहिया अस्पताल में एक दिन की ओपीडी 1000 के आसपास रहती है।
हाल ही में दो महिला डॉक्टरों का किया गया तबादला
पिछले सप्ताह किए गए ट्रांसफरों ने इनकी स्वास्थ्य केंद्रों की हालत और खराब कर दी है। पहले कायमगंज सीएचसी में तैनात डॉ. मधु अग्रवाल का तबादला लोहिया महिला अस्पताल कर दिया गया। तब से यहां कोई महिला डॉक्टर नहीं है। वहीं राजेपुर में तैनात डॉ. जूही पाल को भी लोहिया महिला अस्पताल में संबद्ध किया गया है।
सत्ता के जोर में डॉक्टर आती ही नहीं
कमालगंज सीएचसी में डॉ. कल्पना राजपूत की तैनाती है। वह पड़ोसी जनपद कन्नौज की उमर्दा विधानसभा के विधायक कैलाश राजपूत की बेटी हैं। सत्ता की हनक में वह अस्पताल आती ही नहीं हैं। जिलाधिकारी मोनिका रानी व एसीएमओ डॉ. दलवीर के निरीक्षण में भी वह गैरहाजिर मिलीं थीं। इसके बावजूद कोई फर्क नहीं पड़ा।
सिविल अस्पताल में भी नहीं हैं महिला डॉक्टर
लिंजीगंज सिविल अस्पताल भी अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। यहां पर भी कोई महिला डॉक्टर तैनात नहीं है। दरअसल चार माह पहले यहां तैनात महिला डॉक्टर ने किसी कारण इस्तीफा दे दिया था। तब से यहां कोई डॉक्टर नहीं है।
सीएमओ चला रहे सीएचसी
सीएमओ कार्यालय के पीछे स्थित कैप्टन कौशलेंद्र सिंह सीएचसी के हालात कुछ ज्यादा ही खराब हैं। यहां महिला डॉक्टर तो छोड़िए कोई भी डॉक्टर नहीं है। आलम यह है कि खुद सीएमओ डॉ. अरुण कुमार ही सुबह के समय करीब एक घंटा वहां मरीज देखते हैं।