फर्रुखाबाद। केंद्रीय कमेटी विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति के आह्वान पर बुधवार को भोलेपुर स्थित खंडीय कार्यालय परिसर में अधिकारियों और कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने पावर कारपोरेशन अध्यक्ष संबोधित पांच सूत्री ज्ञापन अधीक्षण अभियंता को दिया है।
बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार करने से शहरी और ग्रामीण खंड के कैश काउंटर बंद रहे। इससे बिजली का बिल जमा करने खंड कार्यालय आए उपभोक्ताओं को वापस जाना पड़ा। अफसर और कर्मचारियों ने कैश काउंटरों के पास धरना प्रदर्शन कर नारेबाजी की। पावर कारपोरेशन अध्यक्ष को संबोधित दिए ज्ञापन में कहा गया कि बिजली नियमों का एकीकरण उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद लिमिटेड का पुनर्गठन किया जाए। इलेक्ट्रिकसिटी आगरा व ग्रेटर नोएडा का निजीकरण निरस्त किया जाए। वर्ष 2000 के बाद भर्ती हुए सभी कार्मिकों के लिए पुरानी पेंशन लागू हो। बिजली कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को द्विपक्षीय वार्ता कर तत्काल निराकरण होना चाहिए। समस्त रिक्त पदों पर नियमित भर्ती हो और नियमित प्रकृति के कार्यों में संविदा, ठेकेदारी समाप्त कर तेलंगाना सरकार की तरह संविदा कर्मियों को नियमित किया जाना चाहिए।
सरकारी क्षेत्र में बिजली घरों का नवीनीकरण हो और निजी घरानों से महंगी बिजली खरीद के लिए सरकारी बिजली घरों को बंद कराने की नीति को समाप्त किया जाए। इस दौरान एक्सईएन ग्रामीण रमेश चंद्र, एक्सईएन सुनील कुमार, एसडीओ राजवीर, एसडीओ शरद प्रताप सिंह, एसडीओ विनीत चौधरी, एसडीओ अवनीश कुमार, एसडीओ आरके वर्मा, अमित मिश्रा, सुधीर गुप्ता, रवींद्र कुमार समेत अन्य लोग मौजूद रहे। उधर, कायमगंज में भी बिजली विभाग के अधिकारी और संविदा कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर धरना प्रदर्शन किया। संगठन की ओर से पांच सूत्री ज्ञापन दिया गया। इस मौके पर एक्सईएन जीएस कशेरवाल, बिजली कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष आदिल खां, नेत्रपाल सिंह, विशाल सिंह वर्मा, रमेश कुमार समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
निदेशक ने हड़ताल करने वालों पर कार्रवाई के दिए आदेश
फर्रुखाबाद। कारपोरेशन के प्रशासनिक विभाग के निदेशक सत्य प्रकाश पांडेय के आए आदेश में कहा गया कि हड़ताल के समय विद्युत आपूर्ति बनाई रखी जाए। कारपोरेशन की संपत्तियों, विद्युत केंद्रों व संयंत्रों की सुरक्षा का ख्याल रखा जाए। किसी का अवकाश स्वीकृत नहीं होना चाहिए। अनुपस्थित होने वाले कर्मियों के प्रति काम नहीं तो वेतन नहीं सिद्घांत का कड़ाई से पालन किया जाए। हड़ताल में शामिल होने वाले कर्मचारियों के विरुद्घ अनुशासनिक कार्रवाई भी की जाए। यदि कोई तोड़फोड़ की घटना होती है तो उसमें रिपोर्ट दर्ज कराई जाए। हड़ताल में शामिल होने के लिए किसी भी कर्मचारी पर दबाव नहीं बनाया जा सकता है। यदि कोई दबाव बनाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।