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एसपी के खिलाफ न्यायालय की अवहेलना का प्रकीर्णवाद दर्ज

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एसपी के खिलाफ न्यायालय की अवहेलना का प्रकीर्णवाद दर्ज
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फर्रुखाबाद। विशेष अदालत एंटी डकैती के न्यायाधीश ने पुलिस अधीक्षक संतोष मिश्रा के खिलाफ कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने का प्रकीर्णवाद दर्ज किया है। यह कार्रवाई लूट और तोड़फोड़ के विचाराधीन मुकदमे के आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ जारी हुए सम्मन तामील व बिना तामील न्यायालय में वापस न करने के मामले में हुई है। कोर्ट से एसपी को नोटिस जारी किया गया है। 17 दिसंबर को एसपी को इस पर जवाब देना होगा।

मेरापुर थाना क्षेत्र के गांव नौली निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक जंग सिंह ने मेरापुर थाने के एसआई गोकुल सिंह, दरोगा मुकेश कुमार, सिपाही एसएस चौहान और सिपाही सुरेश चंद्र के खिलाफ वर्ष 2015 में परिवार दर्ज कराया था। इसमें 24 सितंबर 2015 को घर में घुसकर मारपीट करने, घरेेलू सामान तोड़कर क्षतिग्रस्त करने तथा सात लाख रुपये लूटने का आरोप लगाया था। पीड़ित और दो गवाहों के कोर्ट में बयान होने के बाद चारों आरोपी पुलिस कर्मियों को लूटपाट करने के आरोप में कोर्ट में तलब किया गया। इनके खिलाफ अदालत से सम्मन जारी किए। आरोपी पुलिस कर्मी होने से सम्मन तामील नहीं कराए गए। आरोपी कोर्ट में हाजिर भी नहीं हुए। 11 अक्तूबर 2018 को न्यायालय से एसपी को आरोपी पुलिस कर्मियों के सम्मन भेजने और उनको तामील कराने का आदेश दिया था।
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दो सम्मन को पुलिस ने कोर्ट में वापस कर दिया और दो आरोपियों के सम्मन वापस नहीं किए गए। कोर्ट के आदेश की अवहेलना पर न्यायाधीश ने एसपी को 29 अक्तूबर को नोटिस जारी किया। इसमें 26 नवंबर की तारीख लगाई गई। इस पर एसपी ने कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दी। इसमें कहा कि सम्मन सीओ कायमगंज को भेज दिए थे। जिनके ठीक से तामील न होने पर सीओ सिटी से जांच कराई गई। इसमें डाक मुंशी वीरेंद्र सिंह व कोर्ट पैरोकार शिव कुमार को दोषी पाया गया। कोर्ट के आदेश की अवहेलना में एसपी के खिलाफ न्यायाधीश ने कोर्ट में प्रकीर्ण वाद दर्ज कर नोटिस जारी किया है। इसमें कहा कि अवमानना नोटिस होने पर एसपी ने खुद को बचाने के लिए निम्न स्तर के दो कर्मचारियों को दोषी ठहरा दिया। न्यायालय को गुमराह व भ्रमित करने के लिए जांच रिपोर्ट अदालत भेज दी। इस तरह के कई मुकदमे न्यायालय में लंबित हैं, जिनके आरोपी पुलिस कर्मी हैं और कोर्ट में उपस्थित नहीं होते हैं। इस संबंध में पुलिस महानिदेशक को भी पत्र भेजा गया है। जिन मुकदमों में पुलिस कर्मी आरोपी हैं, उनमें थाना प्रभारी से लेकर पुलिस महानिदेशक तक कोई भी कार्रवाई करने के लिए तैयार नहीं है। इससे वादों में कार्रवाई नहीं हो पा रही है। यह न्यायालय के लिए समस्या बनी हुई है।
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