फर्रुखाबाद। जनपद ओडीएफ घोषित हो चुका है फिर भी कई गांव ऐसे हैं जो अभी तक ओडीएफ नहीं हो सके हैं। अभी वहां पर महिलाएं ‘लोटा पार्टी’ में जाती हैं। सोमवार को शौचालय दिवस मनाया गया। इस पर कायमगंज क्षेत्र के दो गांवों की स्थिति देखी गई तो जमीनी हकीकत कुछ और थी। पता लगा कि कहीं शौचालय नहीं तो कहीं आदत नहीं। इसलिए महिलाएं ओडीएफ जिला घोषित होने के बाद भी खुले में शौच जा रही हैं। ऐसा नगर से सटे गांव टिलियां व जौंरा में देखा गया।
केंद्र सरकार का स्वच्छता अभियान प्रदेश में सपा शासन काल में ही शुरू हुआ था। कायमगंज के जौरा व टिलियां गांव नगर व ब्लाक कार्यालय के नजदीक हैं। पूर्व सपा विधायक अजीत कठेरिया का जौरा गांव है। इस गांव में प्रमुखता से विकास कार्य कराए गए थे। गांव को ओडीएफ बनाने के लिए भी पूरा जोर लगाया गया फिर भी गांव में सभी को शौचालय नहीं मिल सके।
गांव की किशोरी देवी, अहिवरन सिंह, मान सिंह, साधू, मोनू, आदि को शौचालय की जरूरत है, लेकिन इन्हें शौचालय नहीं मिल सका। इससे इनके परिवार की महिलाओं को खुले में शौच जाना पड़ता है। गांव की राजवेटी कठेरिया, आदेश, प्रेमसागर आदि के शौचालय तो बने हैं, लेकिन परिवार की महिलाओं को शौचालय इस्तेमाल करने की आदत नहीं है।
काफी ग्रामीणों का कहना है गांव में तमाम पात्र परिवार हैं उन्हें शौचालय की जरूरत है। तकरीबन यही हाल गांव मुड़ौल के मजरा के टिलियां गांव का है। इस गांव में भी सुबह-सुबह महिलाएं लोटा परेड करतीं दिखाई देती हैं। जिन महिलाओं के शौचालय बने हैं, वह भी और जिनके नहीं बने वह भी महिलाएं खुले में शौच करने जाती हुई दिखाई दीं। इस गांव में 265 शौचालय बनाने का लक्ष्य था। 200 बनाए जा चुके हैं।
125 शौचालय की मांग
कायमगंज जौंरा गांव के प्रधान विंदेश दीक्षित ने बताया गांव में 2300 मतदाता हैं। 450 परिवार हैं। 283 शौचालय बन चुके हैं। 15 दिन पूर्व 125 पात्रों के शौचालय बनवाने के लिए लिस्ट दी गई है। इसके बाद गांव ओडीएफ हो जाएगा।
टिलियां में 265 का लक्ष्य, 200 बन गए
ग्राम पंचायत जौरा व मुड़ौल के मजरा टिलियां के ग्राम पंचायत सचिव प्रदीप यादव ने बताया कि बेस लाइन सर्वे के आधार पर गांव जौरा में पात्रता सूची के सभी 283 शौचालयों का निर्माण हुआ है। इसके आधार पर ही गांव को ओडीएफ घोषित किया गया है। एक परिवार के सभी लोग अलग-अलग शौचालय की मांग करते हैं। उसे पूरा किया जाना संभव नहीं है। टिलियां गांव में 265 का लक्ष्य था। 200 बन गए हैं। अन्य पर काम चल रहा है।