अमर उजाला ब्यूरो
फर्रुखाबाद। मगरमच्छ के बच्चे मिलने के बाद भी वन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर जाना मुनासिब नहीं समझा। हालांकि रेंजर ने बताया कि वन दरोगा को भेज कर जांच कराई जाएगी।
जहानगंज थाना क्षेत्र के गांव गदनपुर तुर्रा निवासी अनुज चतुर्वेदी काली नदी की ओर 24 सितंबर को गया था। अनुज ने मगरमच्छ के कुछ बच्चों को देखा। इसकी सूचना गांव वालों को दी। ग्रामीण मौके पर जाकर एक बच्चे को पकड़ कर गांव ले आए। गांव वालों ने उसे नदी में ही छोड़ दिया। काली नदी में मगरमच्छ के बच्चे मिलने को दो दिन बीत गए। अभी तक वन विभाग के अफसरों ने मौके पर जाना मुनासिब नहीं समझा।
मालूम हो कि करीब चार साल पहले भी मगरमच्छ के बच्चे गांव वालों ने देखे थे। इसके अलावा मोहम्मदाबाद के नवादा गांव के पास काली नदी में मगरमच्छ के बच्चों को देखा गया। यहां पर मगरमच्छ के एक बच्चे को ग्रामीणों ने मार दिया था। बुधवार को रेंजर एसके श्रीवास्तव ने बताया कि इसकी जानकारी मिली है। वन दरोगा को वहां पर भेज कर इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि बरसात होने से यह जीव नदियों में घूमते हुए आ जाते हैं। किसी मादा ने इस क्षेत्र में अंडे दे दिए। जिस कारण ये बच्चे इधर आ गए।
मगरमच्छों को संरक्षण के लिए लखनऊ के कुकरैल में रखा जाता है। उनके बड़े होने के बाद इनको नदियों में छोड़ दिया जाता है। मादा मगरमच्छ पानी से निकलने के बाद कही भटक गई होगी और यहां अंडे दिए होंगे। तभी बच्चे यहां मिले हैं।