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जमीन के सत्यापन में अटके कांजी हाउस

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अमर उजाला ब्यूरो
फर्रुखाबाद। पुराने कांजी हाउस दोबारा संचालित करने की कवायद में अड़चनें सामने आ रही हैं। जिला पंचायत इन्हें दोबारा संचालित करने के लिए जमीनों का सत्यापन करवा रही है। सत्यापन में कांजी हाउस की जमीनें किसी और के नाम दर्ज मिल रही हैं।


शासन ने पुराने कांजी हाउस दोबारा संचालित करने के आदेश जारी किए हैं। इसी के तहत कांजी हाउस की जमीनों की तलाश की जा रही है। 1980-1990 के दशक में जिले में 14 कांजी हाउस संचालित थे। वर्ष 1993-94 में यह सभी लगभग बंद हो गए। 1996 में इन्हें मृत घोषित कर दिया गया। अब सूबे की बीजेपी सरकार ने जानवरों से फसलों को बचाने के उद्देश्य से कांजी हाउसों को दोबारा संचालित करने के आदेश दिए हैं। यह कांजी हाउस जिला पंचायत को अपनी निधि से संचालित कराने हैं। इसके लिए जिला पंचायत ने जमीनों का सत्यापन शुरू कर दिया है। सत्यापन में कांजी हाउस की जमीनें दूसरे लोगों के नाम दर्ज मिल रही हैं।
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राजेपुर ब्लाक में एक कांजी हाउस कड़क्का व दूसरा कुम्रौहर में था। सत्यापन में यह जमीन किसी और के नाम दर्ज मिली। जिला पंचायत ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। पड़ताल की जा रही है कि इस जमीन को जिला पंचायत ने कांजी हाउस के लिए किराये पर लिया था या जिला पंचायत की जमीन के कागज बनवाकर किसी ने अपने नाम दर्ज करवा लिया है। ऐसी ही स्थिति अन्य जगहाें पर भी सामने आ रही है।
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एक कांजी हाउस निकाय क्षेत्र में आ गया
जिले के 14 में से एक कांजी हाउस नगरीय क्षेत्र में आ गया है। पहले कमालगंज में जिला पंचायत का कांजी हाउस संचालित था। तब कमालगंज ग्रामीण क्षेत्र में आता था। बाद में नगर पंचायत का दर्जा मिल गया। जिला पंचायत के अधिकारियों की मानें तो यह कांजी हाउस चालू होना मुश्किल है। जिला पंचायत नगरीय क्षेत्रों में काम नहीं करवाती है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
कांजी हाउस की जमीनों का सत्यापन किया जा रहा है। जमीनें उपलब्ध होते ही कांजी हाउस चालू करवा दिए जाएंगे।
एपी सिंह, अपर मुख्य अधिकारी, जिलापंचायत


जमीनों के सत्यापन में अटके कांजी हाउस
- सत्यापन में दूसरों के नाम पर दर्ज मिल रहीं कांजी हाउस की जमीनें
- एक कांजी हाउस की जमीन हो गई नगर पंचायत के हवाले
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