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बदले रंग रूप में बिक रहा ऑक्सीटोसिन

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अमर उजाला ब्यूरो
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फर्रुखाबाद। ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बदले रंग रूप में मिल रहा है। सरकार ने एक जुलाई से मेडिकल स्टोर पर इसकी बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। शासनादेश में साफ बताया गया था कि यदि एक जुलाई के बाद मेडिकल स्टोर पर ऑक्सीटोसिन मिला तो लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा।

ऑक्सीटोसिन के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने देश भर की फार्मा कंपनियों पर संबंधित इंजेक्शन के निर्माण पर रोक लगाई है। इसके अलावा निजी कंपनियों को ऑक्सीटोसिन के निर्माण का कच्चा माल पहुंचाने पर भी रोक लगा दी थी। इसका नोटीफिकेशन पहले भी जारी किया जा चुका है। सरकार ने ऑक्सीटोसिन के निर्माण की जिम्मेदारी सार्वजनिक क्षेत्र की एक कंपनी को दी है। इसके बावजूद बाजार में ऑक्सीटोसिन बदले रंग रूप में मिल रहा है।
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ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन अब एंपुल के रूप में मिल रहा है। इसकी कीमत भी बेहद कम होती है। यह महज दो से पांच रुपये में मिल जाता है।

गर्भवती को पड़ती है जरूरत
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की जरूरत गर्भवती को पड़ती है। प्रसव के समय जब महिलाओं को दर्द नहीं होता तब इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है।

इंजेक्शन लगाकर निकाला गया दूध नुकसानदेह
जब किसी दुधारू पशु का बच्चा मर जाता है और वह पशु दूध नहीं देती है। ऐसे में लोग दूध निकालने के लिए जानवर को ऑक्सीटोसिन लगा देते हैं। इससे उसे बच्चा जनने जैसा दर्द होता है और वह अपना दूध थन में उतार देती है। इस तरह से निकाले गए दूध का सेवन करने से कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा ऑक्सीटोसिन लगाकर फलों व सब्जियों का साइज भी बड़ा किया जाता है। एक किसान ने बताया कि यदि आप छोटी से लौकी में रात में ऑक्सीटोसिन लगा दें तो सुबह तक लगभग डेढ़ फीट की हो जाएगी।
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ऑक्सीटोसिन पर रोक लगाने का सरकार भरसक प्रयास कर रही है। लोकल कंपनियां चोरी छुपे इसका निर्माण कर रही हैं। इसी कारण यह अब भी आसानी से एंपुल के रूप में बाजार में मिल रहा है। उन्होंने बताया कि यह इतना सस्ता होता है कि हर आदमी इसे खरीद लेता है। - राजकिशोर सिंह, जिला पशु चिकित्सा अधिकारी
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