फर्रुखाबाद। ऑन लाइन बिलिंग सिस्टम शुरू होने से ग्रामीण इलाकों की बिलों की गड़बड़ियां सुधरने के बजाए और बढ़ गई है। विभागीय गड़बड़ियों की भंवर में फंसे ग्रामीण और किसान बिलोें को देखकर बेहाल है।
उनको गलत बिल ठीक कराने के लिए विभाग में अफसरों के यहां चक्कर लगाना पड़ रहा है। कार्यदायी संस्था की लापरवाही से पीडी और जिनकी बिलिंग रोकी गई, वह कनेक्शन फिर से जिंदा कर दिए गए है। इससे विभाग में कनेक्शनों की संख्या बढ़ने के साथ बकायेदारी भी अधिक हो गई है।
बिजली विभाग के ग्रामीण खंड के उपभोक्ताओं को ऑन लाइन किया गया है। ताकि उपभोक्ताओं को समय से और सही बिल मिल सके। ताकि वह उसका भुगतान कर दे और बकायेदारी होने से बच सके। लेकिन यह सब कागजी खेलों के कारण उल्टा हो गया।
किसानों और ग्रामीणों को राहत मिलने की बजाए विभागीय गड़बड़ियों के कारण मुसीबत और बढ़ गई है। विभाग में ऑन लाइन बिलिंग करने और जमा होने वाले रुपयों को घटाकर नया डाटा विभाग को उपलब्ध कराने का दो कार्यदायी संस्थाओं को काम दिया गया है। प्रत्येक माह जिन उपभोक्ताओं के बिलों को भुगतान हुआ है।
उसकी बकायेदारी घटाकर नया डाटा तैयार कर कार्यदायी संस्था विभाग को उपलब्ध कराई है। जिसके अनुसार बिलिंग करने वाली संस्था उपभोक्ताओं के बिल जारी करती है। डाटा उपलब्ध कराने वाली संस्था ने पीडी और जिनकी बिलिंग रोगी गई। उन उपभोक्ताओं का भी कनेक्शन जिंदा कर दिया।
इस कारण ग्रामीण खंड में 123000 उपभोक्ता हो गए है। जबकि वास्तव में बिलिंग योग्य 75910 उपभोक्ता ही हैं। ग्रामीण इलाकों में करीब 55461 उपभोक्ताओं के घरों में मीटर लगे है। इनमें से 4512 उपभोक्ताओं के बिल मीटर की रीडिंग से बनाए जा रहे है।
27760 उपभोक्ताओं के बिल आईडीएफ (मीटर में खराबी) में और 756 उपभोक्ताओं के बिल एडीएफ (मीटर में गड़बड़ी) में बन रहे है। 2419 उपभोक्ताओं के बिल आरडीएफ (गलत रीडिंग) के बन रहे है।
इन गड़बड़ियों के कारण गलत बिल मिलने से किसान उनको जमा नहीं करता और वह विभाग के बकायेदार की श्रेणी में शामिल हो रहे है। प्रत्येक माह 10 से 20 हजार रुपये का बिल आने के कारण ग्रामीण उनको ठीक कराने के लिए विभाग के चक्कर लगाते हैं, फिर भी उनकी समस्या जस की तस बनी है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
डाटा भेजने वाली और बिलिंग करने वाली फर्म की गलती है। इस कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है। जिन उपभोक्ताओं के यहां मीटर लगे है, उनकी फीडिंग नहीं की गई। इस कारण गलत बिल जारी हो रहे है। सभी मीटरों की फीडिंग कराई जा रही है। बिलिंग और डाटा भेजने वाली संस्था से सुधार कराने को उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। -जीएस कशेरवाल, एक्सईएन ग्रामीण
-मीटर लगने के बाद भी गड़बड़ मिल रहे बिजली के बिल
-भुगतान के बाद भी बिलों में जुड़कर आ रही बकायेदारी
-कार्यदायी संस्था के कारण पीडी कनेक्शन हो गए जिंदा
अमर उजाला ब्यूरो