फर्रुखाबाद। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर लगे आरोग्य मेले में डॉक्टरों सहित 15 स्वास्थ्य कर्मी गैरहाजिर मिले। डीएम ने उनका वेतन काटकर स्पष्टीकरण तलब किया। मेले में मरीजों की संख्या भी काफी कम रही। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एक भी मरीज लेकर नहीं पहुंचीं।
प्रत्येक रविवार को शहर के चार और ग्रामीण क्षेत्र के 28 पीएचसी पर मुख्यमंत्री आरोग्य मेला लगता है। उद्देश्य है कि लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके। भोलेपुर पीएचसी पर लगे मेले में डॉ. संध्या वर्मा नहीं पहुंचीं। डॉ. स्मिता शाक्य ने दोपहर दो बजे तक कुल 24 मरीज देखे। इनमें जोड़ों के दर्द से संबंधित अधिक मरीज थे। एलटी विनय कुमार ने पांच मरीजों की जांच की।
फार्मासिस्ट अखिलेश कुमार ने दवाई वितरित की। मेले में एक भी कोरोना टीका नहीं लगाया गया। 22 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता वहां पहुंचीं, लेकिन एक भी मरीज नहीं लाईं। एक गर्भवती की गोदभराई व दो बच्चों का अन्नप्राशन कार्यक्रम कर अपनी ड्यूटी पूरी की।
जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने शमसाबाद क्षेत्र के चार केंद्रों का निरीक्षण किया। पीएचसी चिलसरा में चिकित्साधिकारी, एलटी अंकित, एएनएम प्रीती, मोनिका, अंजू शर्मा, पीएचसी रोशनाबाद में डॉ. सुनीता दिवाकर, एएनएम विश्वमोहिनी, सीएचओ श्वेता कटियार के अलावा संजय कुमार, शिवरतन, एएनएम पूजा वर्मा व संगीता, पीएचसी फैजबाग में डॉ. विवेक विलियम दुुबे, अमित कुमार गैरहाजिर मिले।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व आशा भी कम संख्या में मौजूद होने पर जिलाधिकारी ने सभी का एक-एक दिन का वेतन/मानदेय रोकने के निर्देश दिए। सभी पीएचसी पर प्रसव न कराए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई और सीएमओ को एएनएम की तैनाती कर प्रसव कराने के निर्देश दिए। पीएचसी चिलसरा में गंदगी व बड़ी-बड़ी झाड़ियां देख डीएम ने कर्मचारियों को फटकार लगाई और अभियान चलाकर सफाई कराने के निर्देश दिए।
आरोग्य मेला में पीएचसी चिलसरा में 18 मरीज, रोशनाबाद में 29, पसियापुर में 15 व फैजबाग पीएचसी में 36 मरीजों का उपचार किया गया। जिलाधिकारी ने आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से मरीजों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए।