फर्रुखाबाद। कोरोना महामारी में लोगों का रोजगार छिना तो मनरेगा श्रमिकों का सहारा बनी। जनपद में लक्ष्य के सापेक्ष 135.94 प्रतिशत मजदूरों को ग्राम पंचायतों से काम मिला। इससे मनरेगा के कार्यों में जनपद फर्रुखाबाद ने प्रदेश में सातवां स्थान बनाया है।
जिले के सात विकास खंडों की 600 ग्राम पंचायतों में कुल एक लाख 74 हजार 653 मनरेगा जॉबकार्ड धारक हैं। इनमें 92,468 जॉबकार्ड धारक सक्रिय हैं। मार्च से कोरोना का प्रकोप फैला तो लॉकडाउन में कारखाने, फैक्टरी आदि बंद होने से लोग बेरोजगार हो गए। गैर प्रांतों या महानगरों में काम करने वाले प्रवासी श्रमिक अपने घर लौट आए। जनपद में 16646 श्रमिक वापस आए थे। अब इनके सामने रोजगार का संकट था। इस पर शासन से इनको प्राथमिकता से काम देने का आदेश जारी हुआ। इसी के बाद जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह के निर्देश पर अभियान चलाकर इस वित्तीय वर्ष में कुल 28171 नए जॉबकार्ड बनाए गए। ग्राम पंचायतों में मनरेगा से चकरोड का निर्माण, तालाबों की खुदाई, बूढ़ी गंगा का जीर्णोद्धार, भूमि का समतलीकरण आदि कराया गया तो श्रमिकों को रोजगार मिलने लगा। जिले में कुल 15460 प्रवासी श्रमिकों को मनरेगा से काम मिला तो रोजगार की राह खुल गई। हालांकि अनलॉक होने के बाद प्रवासी श्रमिकों का पलायन फिर शुरू हो गया। इस वर्ष 15,66,859 मानव दिवस का लक्ष्य है। इसके सापेक्ष अब तक 135.94 प्रतिशत 21,29,962 श्रमिकों को काम दिया गया। वहीं सितंबर में तो 150 फीसदी श्रमिकों को काम मिला। इससे जनपद ने प्रदेश में सातवां स्थान बनाया है। जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने बताया कि प्रवासी श्रमिकों को मनरेगा से प्राथमिकता के आधार पर काम दिया जा रहा है।
ब्लाक प्रवासी श्रमिकों को मिला काम
बढ़पुर - 1558
कायमगंज- 2591
कमालगंज- 2735
मोहम्मदाबाद- 2170
नवाबगंज- 1796
राजेपुर- 1925
शमसाबाद- 2685
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कुल - 15460
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