सरकारी विभाग एक-दूसरे को राजस्व का चूना लगाने से नहीं चूकते। रेलवे विभाग ने तो फीस में मनमानी की हद कर दी। रेलवे लाइन के नीचे दो विद्युत उपकेंद्रों की 33केवी भूमिगत केबल निकालने के लिए फीस में चार गुने का अंतर कर दिया गया।
इसमें अधिक लिए गए 23.82 लाख रुपये वापस करने के लिए अधीक्षण अभियंता ने रेलवे बोर्ड को पत्र लिखा है। लोहिया अस्पताल के विद्युत उपकेंद्र के निर्माण में विभागीय अनदेखी के चलते सरकारी धन की खूब बर्बादी हुई।
इस उपकेंद्र की 33केवी लाइन के लिए पहले 3.5 किमी लंबाई का एस्टीमेट बनाया गया। इसका ठेकेेदार को भुगतान भी कर दिया गया। इसकी शासन से शिकायत पर जांच हुई तो लाइन की लंबाई दो किमी ही निकली।
इस पर अधिकारियों ने दबाव बनाकर कार्यदायी संस्था से बची हुई सामग्री स्टोर में जमा कराई। उपकेंद्र की 33केवी लाइन की भूमिगत केबल रेलवे लाइन के नीचे से निकली है। इसके लिए वर्ष 2015 में रेलवे विभाग की तीन शाखाओं द्वारा बनाए गए एस्टीमेट पर 31 लाख 51 हजार 635 रुपये जमा कराए।
जबकि इसी रेलवे लाइन के नीचे से कुछ दूरी पर निकली पांचाल घाट विद्युत उपकेंद्र की भूमिगत केबल के लिए वर्ष 2016 में रेलवे विभाग ने सात लाख 69 हजार सात रुपये जमा कराए।
समान कार्य के लिए धनराशि में 23 लाख 82 हजार 628 रुपये का अंतर देख अधीक्षण अभियंता ने रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ मंडल विद्युत (सा.) इज्जत नगर बरेली को पत्र लिखा है। इसमें लोहिया अस्पताल प्रकरण में चार्ज की गई अधिक धनराशि वापस करने को कहा है।
अधीक्षण अभियंता एके श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने इस संदर्भ में रेलवे विभाग को पत्र भेज दिया है।
किस मद में कितनी जमा हुई धनराशि : लोहिया अस्पताल विद्युत उपकेंद्र की भूमिगत केबल के लिए जुलाई 2015 में रेलवे बोर्ड के सिग्नल विभाग ने 63 हजार 768, इंजीनियरिंग विभाग द्वारा वे लीव चार्ज के नाम पर 30 लाख 59 हजार 502, जबकि विद्युत विभाग द्वारा 28 हजार 365 रुपये सुपरवीजन चार्ज लिया गया।
पांचाल घाट विद्युत उपकेंद्र की भूमिगत केबिल के लिए दिसंबर 2016 में रेलवे बोर्ड के सिग्नल विभाग ने तीन लाख सात हजार 520, इंजीनियरिंग विभाग ने तीन लाख 97 हजार 678, जबकि विद्युत विभाग द्वारा 63 हजार 809 रुपये सुपरवीजन चार्ज लिया गया।
भूमिगत केबल के 23.82 लाख रेलवे बोर्ड से वापस मांगे
लोहिया अस्पताल के विद्युत उपकेंद्र का मामला, चार गुना ले ली थी रकम
अधीक्षण अभियंता ने इज्जत नगर बरेली को भेजा पत्र