फर्रुखाबाद। विधानसभा चुनाव घोषित होते ही रूठों को मनाने का दौर शुरू हो गया है। भाजपा प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर जिलाध्यक्ष ने 11 कार्यकर्ताओं का निलंबन निरस्त करते हुए उन्हें बहाल कर दिया है। इससे वह भाजपा कार्यकर्ता की तरह काम करेंगे।
पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य पद पर भाजपा ने समर्थन देकर प्रत्याशी उतारे थे। समर्थित प्रत्याशियों को लेकर पार्टी में बगावत शुरू हो गई थी। इससे पदाधिकारी ही पार्टी प्रत्याशी के विरोध में उतर गए थे। इसके चलते 30 पदों पर भाजपा के मात्र चार प्रत्याशी ही जीत सके थे। करारी हार को लेकर पार्टी संगठन ने बगावत करने वाले पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।
फतेहगढ मंडल के पूर्व नगर उपाध्यक्ष अरुण त्रिवेदी ने राजेपुर ब्लाक क्षेत्र से अपनी मां को भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ाया था, जबकि युवा मोर्चा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष राजीव प्रताप सिंह ने अपनी भाभी को चुनाव मैदान में उतारा था।
इस कारण दोनों को छह-छह वर्ष के लिए भाजपा से निष्कासित कर दिया गया। मंडल पदाधिकार रहे रहवारी लाल ने भी भाजपा के खिलाफ परिवार से प्रत्याशी उतारा था। इसके अलावा अभिषेक सोमवंशी, रामतीर्थ कुशवाह, अनुज राजपूत, अनिल राजपूत, अजीत राजपूत, सालिग्राम शाक्य, पुष्पेंद्र राजपूत व बूथ अध्यक्ष रहे अवनीश शाक्य ने भी पार्टी प्रत्याशी का विरोध किया था।
इससे सभी के खिलाफ अनुशासनहीनता की कार्रवाई की गई थी। विधानसभा चुनाव आते ही पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई समाप्त कर दी गई। भाजपा जिलाध्यक्ष रूपेश गुप्ता ने प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर 11 कार्यकर्ताओं के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई निरस्त कर उन्हें बहाल कर दिया। इससे अब वह लोग फिर भाजपा कार्यकर्ता के रूप में कार्य करेंगे।