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रामकिंकर सम्मान से अलंकृत हुईं देश की तीन विभूतियां

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अयोध्या। गुरुपूर्णिमा की पूर्व संध्या पर रामायणम आश्रम में मंदाकिनी रामकिंकर के सानिध्य में सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। समारोह में कुलपति डॉ.गोपाल पाठक ,पूर्व विधायक रघुनंदन शर्मा व डॉ.नीलिमा पाठक को रामकिंकर सम्मान से अलंकृत किया गया।
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सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए मंदाकिनी रामकिंकर ने कहा कि गुरु का अनुशासन स्वीकारने से सफलता का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। जीवन में पूर्णता की प्राप्ति के लिए गुरु की कृपा आवश्यक है।
कहा कि रामकथा को चाहे जिस रूप में देखा जाए, पढ़ा जाए या सुना जाए वह कल्याणकारी है। रामकिंकर सम्मान से अलंकृत सरला बिरला विश्वविद्यालय रांची के कुलपति डॉ. गोपाल पाठक ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने कहा है कि ज्ञान की अंतिम पराकाष्ठा विज्ञान है और विज्ञान की अंतिम पराकाष्ठा है आध्यात्म।
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एक वैज्ञानिक सत्य की खोज कर आध्यात्म की ऊंचाइयों को स्पर्श कर लेता है व सत्यम शिवम सुंदरम की स्थापना करता है। एक वैज्ञानिक में, शिक्षाविद् में ईश्वरीय सामर्थ्य का प्रकटीकरण प्रभु कृपा का ही परिणाम है।
पूर्व विधायक रघुनंदन शर्मा ने कहा कि समाज सेवा ही सच्ची प्रभु की सेवा है। जिसकी प्रेरणा भी प्रभु कृपा का ही परिणाम है। समाज सेवा के भी अनेक रूप हैं। साहित्य, शिक्षा, स्वास्थ्य व राजनीति के माध्यम से समाज को सही दिशा दृष्टि दी जा सकती है।
समाज की सेवा की जा सकती है, मानव मूल्यों को संबल दिया जा सकता है। रांची विश्वविद्यालय की संस्कृत विभाग की पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि आत्म अनुशासन ही राम है। इस सूत्र को जिसने जीवन का मूल मंत्र बना लिया उसका जीवन सार्थक हो जाएगा।
मंदाकिनी रामकिंकर ने बताया कि आश्रम में बुधवार को गुरुपर्व महोत्सव विविध अनुष्ठानों के मध्य धूमधाम से मनाया जाएगा। सम्मान समारोह का उद्घाटन नगर विधायक वेदप्रकाश गुप्ता ने किया। संचालन पंडित नर्मदा मिश्र ने किया।
कार्यक्रम में डॉ. कैलाश गर्ग, योगाचार्य डॉ.चैतन्य, माधव अग्रवाल, रमेश चंद्र श्रीवास्तव, विकास मेहरोत्रा, जगदीश चंद्रा, डॉ.दिलीप सिंह, डॉ.आरके सिंह, प्रो.लक्ष्मीकांत सहित अन्य मौजूद रहे।
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