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जुलाई में अब तक सिर्फ 6.5 फीसदी बरसात

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अयोध्या। बारिश न होने से हालात खराब होते जा रहे हैं। नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार मानसून कमजोर पड़ने से अभी एक सप्ताह बारिश की संभावना नहीं है।
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इसके चलते हालात सूखे की तरफ बढ़ रहे हैं। खेतों में दरार पड़ने लगी है। जुलाई में अभी तक सिर्फ 19 एमएम वर्षा हुई है जबकि सामान्य वर्षा करीब 292 एमएम मानी जाती है। इस हिसाब से 12 जुलाई तक महज 6.5 प्रतिशत ही वर्षा हुई है।
शहर से लेकर गांव तक जल स्तर गिर रहा है। हैंडपंपों से लेकर सामान्य बोरिंग से मोटर के सहारे भी पानी निकलना लगातार कम हो रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अभी तक जिले में औसत से काफी कम बारिश हुई है।
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मानसून आने की तिथि 22 जून से 12 जुलाई तक की बात की जाए तो अब तक महज 28.4 एमएम बारिश ही हुई है। इसमें जून माह में 9.4 एमएम व जुलाई माह की 19 एमएम वर्षा शामिल है।
मौसम विभाग ने इस वर्ष समय पर मानसून आने व सामान्य के आसपास वर्षा होने का अनुमान जताया था। इससे लोगों के चेहरे खिल गए थे। इस वर्ष अब तक की वर्षा की बात की जाए तो फरवरी माह में औसत से 22.1, मार्च व अप्रैल में शून्य प्रतिशत, मई में सामान्य से ज्यादा 189.7 फीसदी बारिश हुई है।
वहीं इस वर्ष सबसे अधिक वर्षा जनवरी में हुई है। इस माह की औसत वर्षा 12.7 एमएम है, जबकि इसके सापेक्ष इस माह में 34.6 एमएम वर्षा हुई थी। जनवरी से अब तक सामान्यत: करीब 493 एमएम वर्षा होनी चाहिए, जबकि अब तक कुल 134 एमएम ही वर्षा हुई है।
वहीं वर्ष 2021 की बात की जाए तो मई में 140.8, जून में 214.6 व जुलाई में 114.8 एमएम बारिश हुई थी। मौसम विभाग के अनुमान के बाद भी मानसून दगा दे गया। जून में सामान्य वर्षा 132.4 एमएम के सापेक्ष मात्र 28.7 प्रतिशत कुल 38 एमएम बारिश ही हुई।
जबकि 12 जुलाई तक मात्र 19 एमएम बारिश हुई है। जुलाई की सामान्य वर्षा करीब 292 एमएम मानी जाती है। वर्ष 1986 से अब तक की बात की जाए तो जुलाई माह में सबसे कम वर्षा वर्ष 1991 में 23 एमएम वर्ष हुई थी।
दूसरे नंबर पर वर्ष 1995 रहा था, इस वर्ष जुलाई में 58 एमएम वर्षा हुई थी। अगर ऐसे ही हालात रहे तो संभव है कि 31 साल में जुलाई 2022 सबसे कम वर्षा वाला बन जाएगा। मानसूनी बारिश न होने से सबसे अधिक नुकसान किसानों का हो रहा है।
जिले के 80 प्रतिशत खेतों में अभी धान की रोपाई नहीं हो पाई है। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि आगे कुछ दिनों अगर बारिश नहीं हुई तो धान की पैदावार कम होना तय है।
बारिश न होने से अब जल स्तर में कमी आने तथा पेयजल संकट का भी सिलसिला शुरू हो गया था। अब हालात यह हैं कि यह है कि अयोध्या समेत पूर्वी उत्तर प्रदेश सूखे की चपेट की ओर बढ़ रहा है।
इस बार बारिश कम होने से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें उत्पन्न हो गई हैं। रुदौली तहसील के किसान चिंतामणि व राजनारायन ने कहा कि धान रोपाई के लिए सिंचाई कर पाना कठिन हो रहा है। बारिश न होने व सामान्य ट्यूबवेल समुचित पानी नहीं दे रहा है।
इससे रोपाई के लिए खेत तैयार नहीं हो पा रहा है। यदि बारिश नहीं होती है, तो धान की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। फूलों की खेती करने वाले बीकापुर क्षेत्र के किसान राजेंद्र प्रसाद व महेश सोनकर ने कहा कि बारिश न होने से गेंदे के फूल बड़े नहीं हो रहे हैं।
ऐसे में उनकी खूबसूरती व वजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यदि पानी की समस्या इसी प्रकार बनी रही, तो फूलों की खेती करने वाले किसानों को व्यापक मुश्किलें उठानी पड़ेगी।
सब्जी व्यवसायी शिवकुमार ने कहा कि बरसात में उगाई जाने वाली सब्जी बारिश न होने से तैयार नहीं हो रही है। नेनुआ, तरोई, सरपुतिया, बंडा, अरुई जैसी सब्जी की खेती करने वाले किसानों को बड़ा नुकसान हो रहा है।
पांच साल की बारिश का आंकड़ा
वर्ष मई जून जुलाई औसत वर्ष (वर्ष भर की बारिश, एमएम)
2018 11 12.4 340.6 836.6
2019 00 24 396 1011
2020 48 230.8 254.2 1089.4
2021 140.8 214.6 114.8 1053
2022 40.4 38 19(12 जुलाई तक) 135
जुलाई में अब तक महज 6.5 फीसदी ही बारिश हुई है। मानसून कमजोर पड़ गया है। जिसके चलते अभी एक सप्ताह तक बारिश नहीं होने के आसार है। जिस हिसाब से संभावनाएं बन रही है, उस तरह सूखे के हालात पैदा हो रहे हैं। आगामी सप्ताह पूर्वी उत्तर प्रदेश में हलके से मध्यम बादल छाए रहेंगे, कही कही बूंदाबांदी हो सकती है।- डॉ. अमरनाथ मिश्र, मौसम वैज्ञानिक, कृषि व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय
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