अयोध्या। हरियाली और वनीकरण के लिए अभियान के तहत रोपे गए लाखों पौधों के सूखने का खतरा उत्पन्न हो गया है। येे खतरा लॉकडाउन में इन पौधों को कई हफ्ते से पानी न मिलने के कारण उत्पन्न हुआ है।
इनमें जीर्णोद्धार के बाद तमसा नदी के तट पर रोपे गए लगभग दो लाख पौधे भी शामिल हैं। केवल वन विभाग से रोपे गए पौधों को पानी मिलने की व्यवस्था बताई गई है। अन्य के लिए इस दौरान कोई व्यवस्था नहीं हो पाई।
पर्यावरण संतुलन, हरियाली और वनीकरण को लेकर अभियान के तहत रिकार्ड 33 लाख पौधे रोपे गए थे। ये पौधे वन, ग्राम्य विकास, मनरेगा सहित अन्य विभागों से रोपवाए गए थे। वन विभाग से सर्वाधिक 13 लाख पौधे जिले के विभिन्न क्षेत्रों में रोपे गए थे।
ग्राम्य विकास विभाग ने 14.19 लाख, पंचायतीराज ने 1.41 लाख सहित कुल 25 विभागों ने पौधे रोपे थे। ग्राम्य विकास विभाग से ग्राम पंचायतों के व्यक्तिगत लाभार्थियों ने भी पौधों का रोपण किया था।
तमसा के जीर्णोद्धार के बाद इसके तट पर हरियाली के लिए वन विभाग ने लगभग 77 हजार तो ग्राम पंचायतों ने लगभग 1.24 लाख पौधों का रोपण किया था। ये रोपाई पिछली बारिश के दौरान जुलाई से अक्टूबर के मध्य कराई गई थी। रोपे गए सभी पौधे डेढ़-दो फीट और इससे बड़े आकार में हैं।
वन विभाग को तो नर्सरियों के साथ ही पौधों की सुरक्षा, संरक्षा और सिंचाई के लिए लॉकडाउन में भी देखरेख की अनुमति थी। व्यक्तिगत लाभार्थी अपने पौधे की देखभाल स्वयं कर रहे हैं लेकिन तमसा के किनारे, ऊसर और सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए पौधों की देखभाल और पानी देने और इनकी सुरक्षा की व्यवस्था मनरेगा के जरिए की जा रही थी।
सभी ग्राम पंचायतों से एक-दो मजदूर इस काम के लिए लगाए गए थे। 25 मार्च से देश में लॉकडाउन के चलते मनरेगा में भी काम ठप हो गया। मजदूरों का घर बैठ जाना मजबूरी हो गई। हरियाली के लिए रोपे गए इन पौधों को पानी मिलना भी बंद हो गया। जबकि लगभग इसी दौरान गर्मी बढ़नी शुरू हो गई।
इस वक्त इन छोटे पौधों को ज्यादा पानी की जरूरत है। इस समय तो इन पौधों को प्रतिदिन पानी के साथ ही देखभाल की ज्यादा जरूरत है। मगर सिंचाई न होने से ये पौधे मुरझाने लगे हैं। यदि इन पौधों को कुछ दिन सुरक्षा के साथ पानी और न मिला तो लाखों पौधे सूख जाएंगे।
उप श्रमायुक्त, मनरेगा नागेंद्र मोहन राम त्रिपाठी का कहना है कि लॉकडाउन में पौधों की सुरक्षा और सिंचाई को लेकर असुविधा हुई है। पौधों के सूखने का खतरा उत्पन्न हो गया है। इनकी देखभाल और सिंचाई के लिए मनरेगा से मजदूर न लगा पाने की मजबूरी है। अगले कुछ ही दिन में जैसे मनरेगा से काम शुरू हुआ सबसे पहले इसकी मॉनीटरिंग के साथ पौधों की सिंचाई की व्यवस्था कराई जाएगी। जिससे ये सूखने न पाएं।
डीएफओ मनोज खरे ने कहा कि वन विभाग की नर्सरियों और पौधों की सुरक्षा और सिंचाई के लिए लॉकडाउन के दौरान अनुमति थी। ऐसे में विभाग से रोपे गए पौधों को कोई क्षति होने की संभावना नहीं है।