हालांकि अभी भी नदी का जलस्तर खतरे के निशान 92.730 मीटर से 63 सेंटीमीटर नीचे है। नदी में बाढ़ के संभावित खतरे को लेकर तटवर्ती इलाकों में हलचल बढ़ गई है।
वहीं नदी के बढ़ते-गिरते जलस्तर से कटान भी तेजी से हो रही है। लगभग माह भर से सरयू के जलस्तर में बढ़ोत्तरी के साथ तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा था।
हालांकि जलस्तर में ठहराव के साथ गिरावट शुरू हो जाने से तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा कम हो गया था लेकिन कटान तेजी से शुरू हो गई थी। दो दिनों से पहाड़ों पर हो रही बारिश का असर नदी के जलस्तर में दिखने लगा है। नदी का जलस्तर 24 घंटे में लगभग 20 सेंटीमीटर बढ़ गया है।
केंद्रीय जल आयोग के बलराम के मुताबिक शनिवार की शाम छह बजे जलस्तर 91.900 मीटर पर स्थिर था। रात्रि में 11 बजे से जलस्तर में बढ़ोत्तरी दर्ज की जाने लगी। एक से डेढ़ सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ते हुए जलस्तर रविवार शाम छह बजे 92.050 मीटर पर पहुंच गया है।
बताया गया कि एल्गिन ब्रिज पर जलस्तर स्थिर हो जाने से सोमवार को जलस्तर 92.200 मीटर तक पहुंचने की संभावना है। लाल निशान की तरफ तेजी से बढ़ते जलस्तर से जिले के तटीय क्षेत्रों में बाढ़ के खतरे को लेकर हलचल बढ़ गई है।
हालांकि प्रशासनिक स्तर पर बाढ़ को लेकर बाढ़ चौकियां खोले जाने, राहत व बचाव के लिए नाव लगाए जानें और राजस्व कर्मियों की तैनाती पूर्व में ही कर दी गई है।
पूराबाजार प्रतिनिधि के मुताबिक क्षेत्र के बाढ़ से प्रभावित होने वाले गंावों मूड़ाडीहा, पूरे चेतन, माझा सलेम पुर, पिपारी संग्रम, उरदहवा बस्ती के वाशिंदों में लगभग दर्जनों परिवार अपने-अपने परिवार व मवेशियों के साथ बिल्वहरिघाट-अयोध्या बंधा पर घास-फूस व तिरपाल के नीचे सुरक्षित ठिकाना बना लिया है।
वहीं नदी के घटते-बढ़ते जलस्तर से क्षेत्र में कटान तेजी से हो रही है। प्रशासन द्वारा क्षेत्र में कटान की रोकथाम के लिए कोई कार्रवाई न किए जाने से ग्रामीणों में रोष है।