किसी तरह जिला मुख्यालय पर इंतजाम कर काम चल रहा है। यह हालत सेवा प्रदाता कंपनी की ओर से अपने कर्मचारियों के नाम शासन से लाखों रुपये भुगतान लेने पर भी उन्हें फूटी कौड़ी नहीं देने से हुई है।
शासन स्तर से सेवा प्रदाता कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करने के बाद वैकल्पिक इंतजाम न होने से कृषि विभाग की सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं।
मंडल के सभी पांचों जिलों में हजारों किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच के लिए इस लैब से उस लैब तक दौड़ रहे। वजह लैब के संचालन के लिए शासन स्तर पर जिस सेवा प्रदाता वीवीएचआईआर कंपनी को नामित किया गया था, उसने फ्रॉड कर लिया।
कंपनी कर्मचारियों के मानदेय में हेराफेरी करने की वजह से ब्लैक लिस्टेड घोषित हो गई है। यह कार्रवाई ने शासन से मई माह में की गई, लेकिन जून तक जैसे-तैसे सेवाएं चली।
जुलाई में भी कुछ कर्मी काम करते रहे, मगर अब पूरी तरह मंडल के सभी ब्लॉकों में 134 विषय वस्तु विशेषज्ञ और तकनीकी विशेषज्ञों ने काम बंद कर दिया है। मंडल के 12 लैब में एक-एक तकनीकी विश्लेषक, तकनीकी सहायक और लैब असिस्टेंट ने भी काम छोड़ ताला लगा दिया है।
कंपनी के जिम्मदार फरार हैं। कर्मचारियों के नाम मिले लाखों का मानदेय लेकर कहां लापता है, कुछ पता नहीं चल रहा है। मामले को लेकर कृषि विभाग के अधिकारी कहते हैं कि सेवा प्रदाता संस्था का चयन शासन से हुआ था, जब यहां कर्मचारियों ने जनवरी से भुगतान बंद हुआ, तो आंदोलन के बाद मामला पता चला।
इसकी रिपोर्ट जून माह में भेजी गई थी। मामले में लखनऊ में दर्ज रिपोर्ट भी यहां कोतवाली में ट्रांसफर हुई, लेकिन मानदेय न मिलने से अब काम पूरी तरह ठप हो गया है।
बीकापुर क्षेत्र के जगनपुर निवासी जय प्रकाश चौधरी ने अपने खेत की मिट्टी
की जांच के लिए बीकापुर स्थित क्षेत्रीय मृदा परीक्षण लैब में नमूना भेजा।
लेकिन यहां कांट्रेक्ट पर काम कर रहा स्टाफ वेतन न मिलने से ताला बंद कर
चुका था। जैसे-तैसे उसका नमूना जिला लैब भेज जांच कराई गई। यहां ऐसे
सैकड़ों किसानों के मामले जांच न होने से लटके बताए जा रहे हैं। उनकी
मिट्टी जैसी छोटी जांच में पखवारे से महीने तक लग जा रहे हैं।
रुदौली के नूर मोहम्मद पहले अपनी मिट्टी पहचानों अभियान शुरू होने का
इंतजार कर रहे थे। अभियान नहीं चला तो खुद ही मिट्टी का नमूना लेकर रुदौली
लैब में पहुंच गए।
पता चला कि वर्तमान में मिट्टी परखने वाला कोई कर्मचारी
नहीं है। महज चौकीदार ही लैब पर मौजूद रहा। मजबूरन वह मिट्टी की जांच के
लिए जिला मुख्यालय लैब में नमूना दिया तो उनके मिट्टी की जांच हो पाई।
संयुक्त कृषि निदेशक, फैजाबाद मंडल डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि मानदेय के लिए शासन से जो दर निर्धारित थी उस धन को सभी जिलों के सहायक निदेशक मृदा परीक्षक और उप निदेशक कृषि ने कंपनी के खाते में हस्तांतरित किया था।
फिर भी कंपनी फिल्ड और लैब में कार्य करने वाले कर्मचारियों को मानदेय भुगतान नहीं की। इसलिए कंपनी के खिलाफ शासन में पत्र लिखा गया था, अब सेवा प्रदाता संस्था को ब्लैक लिस्टेड घोषित कर रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है।
लेकिन सबसे अहम बात यह है कि मंडल में किसानों को तकनीकी व विषय वस्तु की जानकारी देने का काम ठप होने से उनकी परेशानी बढ़ गई है। नई सेवा प्रदाता के चयन तक असर बरकरार रहेगा।