रामलला जिस टेंट के अंदर विराजमान हैं वह कई जगहों से फट चुका है। इससे पहले तिरपाल जुलाई 2014 में बदला गया था। इसे लेकर यहां पक्षकारों ने भी सवाल उठाए थे।
मरम्मत में दो लाख से अधिक धनराशि चढ़ावे से खर्च की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को रामलला के मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर में फटे तिरपाल से बारिश का पानी टपकने को लेकर ऑब्जर्वर की रिपोर्ट पर मरम्मत कराने की अनुमति दी है।
गौरतलब है कि 77 एकड़ के अधिग्रहीत परिसर में भक्तों की सुविधाओं का कोई इंतजाम नहीं है। सोमवार को लगभग 28 हजार भक्तों ने दर्शन किए। लेकिन सबके चेहरे पर घोर असुविधाओं का दर्द छलकता रहा।
रामलला के दर्शन के लिए आने वालों कतार में खड़े होते हैं। लेकिन मौके पर न तो छांव के इंतजाम हैं, और न पेयजल। बैठने के
लिए भी कोई व्यवस्था नहीं है।
सोमवार को कतार में बस्ती के रंगूलाल, जयराम कहते हैं कि दो
घंटे से पानी नहीं मिला। दुकानें भी दूर हैं। सामान रखने का पैसा देना
पड़ा। दिल्ली की दीपिका कहतीं है कि धूप में तड़प रहे हैं, बच्चे परेशान
हैं। सुविधाएं होनी चाहिए।
कानपुर के रामकिशोर,
राजकुमार पांडेय व प्रीति ने कहा दर्शन तो हो गए, मगर जूते पहन कर। प्रवेश
द्वार पर सुरक्षाकर्मी ने कहा कि जूता निकालेंगे, लौटते वक्त गेट तक नहीं आ
पाएंगे। देवरिया के भीम प्रसाद कुशवाहा ने कहा कि दो घंटे लगे, परिसर में
कोई इंतजाम नहीं था, जहां दो पल सुस्ता सकें।
उधर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी दाखिल की है जिसमें तीर्थयात्रियों के लिए पीने का पानी व प्रसाधन जैसी बुनियादी सुविधाओं का सवाल उठाया हैं।
विवादित परिसर के रिसीवर व कमिश्नर फैजाबाद सूर्य प्रकाश मिश्र ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला रामलला के मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर में फटे तिरपाल की मरम्मत करने को लेकर है। इस कार्य को फैजाबाद के कलेक्टर और दो स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की निगरानी में कराए जाने की मंजूरी दी गई है।