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वेबसाइट पर कुछ विषय अपलोड नहीं, भटक रहे छात्र

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अयोध्या। नई शिक्षा नीति के तहत अवध विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों ने प्रवेश तो ले लिया है, लेकिन अब इस नीति का क्रियान्यवन करने में दिक्कतें आ रही हैं। सबसे ज्यादा परेशानी छात्र-छात्राओं को हो रही है।
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नई शिक्षा नीति के तहत प्रवेश लेने के बाद जब छात्र परीक्षा फॉर्म भर रहे हैं तो उनके द्वारा चुना गया विषय विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर शो ही नहीं कर रहा है। जिससे साकेत समेत अन्य महाविद्यालयों के हजारों छात्रों का भविष्य अधर में फंस गया है।
परीक्षा फॉर्म न भर पाने की स्थिति में ऐसे छात्रों को परीक्षा से वंचित होना पड़ सकता है। महाविद्यालय की छात्रा मीनाक्षी उपाध्याय ने बताया कि एक तो फीस में वृद्धि कर दी गई है। परीक्षा फॉर्म का पैसा जमा हो गया है।
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अब दोबारा पैसा लिया जा रहा है। नई शिक्षा नीति के तहत राजनीति विज्ञान और शिक्षाशास्त्र विषय प्रायोगिक कर दिए गए हैं। विद्यार्थियों को इसकी जानकारी ही नहीं है।
वहीं नीति के तहत दूसरे संवर्ग से जो विषय लिया गया है वह परीक्षा फॉर्म भरने के समय वेेबसाइट पर शो ही नहीं कर रहा है, जिससे हजारों छात्र परीक्षा फॉर्म नहीं भर पा रहे हैं।
छात्र अंकुर सिंह ने कहा कि महाविद्यालयों ने नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों का प्रवेश भी ले लिया अर्थात दो विषय एक वर्ग से तथा एक दूसरे वर्ग से। महाविद्यालयों में कक्षाएं प्रारंभ हुई और अपने चुने हुए विषयों के अनुसार छात्रों ने पढ़ाई भी की।
जब परीक्षा फॉर्म भरने का नंबर आया तो जो विषय विद्यार्थी ने दूसरे संवर्ग से लिया था वह विषय ऑनलाइन परीक्षा फॉर्म विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर नहीं दर्शा रहा है। छात्र इसको लकर परेशान हैं।
कहा कि दूसरी तरफ वेेबसाइट लॉक होने के कारण अकेले साकेत महाविद्यालय के ही करीब 500 छात्रों का यूआईएन सत्यापन नहीं हो पाया है। बिना सत्यापन के परीक्षा फॉर्म नहीं भरा जा सकता।
बीए प्रथम सेमेस्टर की छात्रा आभा सिंह ने कहा कि उनकी समस्या न तो महाविद्यालय और न ही विश्वविद्यालय प्रशासन समझ रहा है। यदि परीक्षा फॉर्म समय से नहीं भर पाए तो परीक्षा से वंचित हो जाएंगे।
हमारा साल बर्बाद हो जाएगा। बीकॉम प्रथम सेमेस्टर के छात्र प्रफुल्ल ने कहा कि एक तो फीस वृद्धि ने पहले ही परेशान किया था अब यह एक नई समस्या आ गई है। महाविद्यालय में पढ़ाई किसी और विषय की हो रही है और परीक्षा पाठ्यक्रम कुछ और है।
छात्रों को पता था कि राजनीति शास्त्र और शिक्षा शास्त्र सैद्धांतिक विषय है, प्रायोगिक नहीं और अब परीक्षा के समय उनसे कहा जा रहा है कि दोनों विषय प्रायोगिक हैं।
1986 के बाद भारत में पहली बार नई शिक्षा नीति का मसौदा 2020 में बन कर तैयार हुआ। देश के लगभग सभी विश्वविद्यालयों ने सत्र 2021-22 से अंगीकृत कर लिया।
नई शिक्षा नीति की मुख्य विशेषता यह है कि अब विद्यार्थी अपने पसंद का कोई भी विषय पढ़ सकता है। विज्ञान वर्ग का विद्यार्थी कला वर्ग का विषय भी लेकर स्नातक कर सकता है।
तीन मुख्य विषयों के साथ एक माइनर विषय भी लेना है जिसे सिर्फ पहले सेमेस्टर में ही पढ़ा जाना है। इसके अतिरिक्त छात्रों को महाविद्यालय द्वारा निर्धारित कोई एक प्रोफेशनल और स्किल डेवलपमेंट कोर्स भी करना होगा।
नई शिक्षा नीति के जानकार साकेत महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.जन्मेय तिवारी बताते हैं कि विश्वविद्यालय ने राज्य पाठ्यक्रम समिति द्वारा जारी किया हुआ कॉमन पाठ्यक्रम भी अंगीकृत किया है।
कुछ विषयों में बदलाव भी किए गए परंतु उनको विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर नहीं डाला गया। जिसका खामियाजा छात्र भुगत रहे हैं। अवध विश्वविद्यालय ने इस बार राजनीति विज्ञान व शिक्षाशास्त्र विषयों को भी प्रायोगिक विषय की श्रेणी में रख दिया है।
जबकि अधिकांश विश्वविद्यालयों ने अपने पाठ्यक्रमों में राजनीति विज्ञान और शिक्षा शास्त्र को पूर्णतया सैद्धांतिक ही रहने दिया है। अवध विश्वविद्यालय ने पाठ्यक्रम संशोधन को गंभीरता से नहीं लिया।
नई शिक्षा नीति को लेकर जो भ्रम की स्थित है उसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। साकेत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.अभय कुमार सिंह ने बताया कि छात्रों के हित को देखते हुए अवध विवि ने परीक्षा फॉर्म भरने की तिथि 27 से बढ़ाकर अब 31 दिसंबर कर दी है।
कहा कि कुलपति के निर्देशानुसार महाविद्यालय की टीम समस्याएं दूर करने में लगी है। कोई भी छात्र परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित न रह जाए इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। जो भी तकनीकी समस्याएं आ रही हैं उनको दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
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