अयोध्या। सरयू तट पर संचालित फिल्मी कलाकारों की रामलीला के नौवें दिन कुंभकर्ण व मेघनाद के वध प्रसंग के मंचन ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। कुंभकर्ण व मेघनाद के वध के बाद रावण शोक में डूब जाता है।
लंका में उदासी छा जाती है। कुंभकर्ण की भूमिका में रजा मुराद ने अपने अभिनय व प्रभावी संवाद से दर्शकों का आकर्षण चुराया। नौवें दिन के रामलीला मंचन की शुरूआत हर्ष के माहौल से होती है।
संजीवनी बूटी ग्रहण करते ही मूर्छित पड़े लक्ष्मण होश में आ जाते हैं। उनके होश में आने से रामादल में खुशी छा जाती है। जय श्रीराम के जयकारे गूंजने लगते हैं। अगले दृश्य में रावण का दरबार सजा होता है।
दूत समाचार लेकर आता है महाराज मूर्छित लक्ष्मण ठीक हो गया है। रावण भ्राता कुंभकर्ण को निद्रा से जगाने को कहता है। कुंभकर्ण निद्रा से उठते हैं और रावण से उन्हें जगाने का कारण पूछते हैं। रावण कुंभकर्ण को जानकारी देता है।
अगले दृश्य में कुंभकर्ण युद्ध स्थल में प्रवेश करता है। कुंभकर्ण के आते ही रामादल में हाहाकार मच जाता है। वह श्रीराम को युद्ध के लिए ललकारता है। श्रीराम व कुंभकर्ण का घनघोर युद्ध होता है।
वानरों का भक्षण करते हुए कुंभकर्ण विकट युद्ध करता है। अंत में श्रीराम उसका संहार कर देते हैं। अगले दृश्य में मेघनाद यज्ञ कर रहा है। लक्ष्मण सहित हनुमान वानरों सहित पहुंचकर यज्ञ विध्वंस करते हैं।
इसके बाद मेेघनाद व लक्ष्मण के बीच घमासान होता है। मेघनाद लक्ष्मण से कहते हैं उस बार भाग्य ने बचा लिया, इस बार न बचने पाएगा। लक्ष्मण जवाब देते हैं ओ मेघनाद इन बातों का, तू मार न शोभा पाता है।
रण में बातें करने वाला, कायर भयभीत कहलाता है...इसके बाद दोनों में युद्ध शुरू हो जाता है। लक्ष्मण मंत्र पढ़कर बाढ़ छोड़ते हैं मेघनाद का शरीर कई भागों में विभक्त हो जाता है। राक्षस भाग जाते हैं।
अगले दृश्य में रावण अहिरावण से मदद मांगता है। अहिरावण राम व लक्ष्मण का हरण कर उन्हें पाताल लोक में कैद कर लेता है। हनुमान जी पाताल लोक जाते हैं और अहिरावण का वध करके राम-लक्ष्मण को सकुशल वापस ले आते हैं।
इसके बाद राम व रावण के युद्ध के प्रसंग का मंचन होता है। राम-रावण युद्ध करते हैं, रावण घायल हो जाता है। इसी प्रसंग के साथ ही नौवें दिन की रामलीला का समापन होता है।