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साल भर में कम से कम चार बार बदले जाएं रामलला के वस्त्र

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अयोध्या। रामनगरी के संतों व विहिप ने मांग की है कि अधिग्रहीत परिसर में विराजमान रामलला को वर्ष में कम से कम चार बार कपड़े मिलने चाहिए। वर्तमान में केवल रामनवमी पर रिसीवर द्वारा रामलला को कपड़ों के नए सेट प्रदान किये हैं, यही सालभर पहनाए जाते हैं। रोजाना कपड़ों की धुलाई भी नहीं की जाती है। कभी गंदी दिखने पर पुजारी ही परिसर में धुल देते हैं। ये परंपरा पिछले 27 वर्ष से चली आ रही है।
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‘अमर उजाला’ ने ‘साल में एक बार ही बनवाए जाते हैं रामलला के वस्त्र’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर इस ओर ध्यान आकृष्ट कराया था। जिसके बाद अब रामनगरी के संतों व विश्व हिंदू परिषद ने भी आवाज उठाई है कि रामलला को वर्ष में केवल एक बार ही नए कपड़े प्रदान करना उचित नहीं है।
विहिप व संतों की मांग है कि रामलला को वर्षभर में कम से कम चार बार कपड़े देने चाहिए। साथ ही उत्सव-समैया में भी रामलला को नए परिधान से सुसज्जित करना चाहिए। संतों का कहना है कि वे इस समस्या को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी ध्यानाकृष्ट कराएंगे।
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रामजन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि वर्ष में चार मुख्य मौसम होते हैं बसंत, ग्रीष्म, शरद और शीत ऋतु। इन चार सत्रों में भगवान के लिए नए कपड़ाें की व्यवस्था करनी चाहिए। अभी एक ही बार रामनवमी के समय में ही नए वस्त्रों के सेट भगवान को दिए जाते हैं जो पूरे वर्ष पहनाये जाते हैं। विवादित परिसर के रिसीवर को चाहिए कि वे रामलला के लिए साल में कम से कम चार बार वस्त्रों की व्यवस्था करें।
रामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य महंत कमलनयन दास ने भी मांग की है कि वर्ष में कम से कम चार बार रामलला के लिए नए वस्त्र की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब हम नए-नए कपड़े पहनना पसंद करते हैं, तो रामलला को साल में कई बार नए कपड़े पहनने को क्यों नहीं मिलते? कहा कि इस ओर शीघ्र ही संत मुख्यमंत्री का भी ध्यानाकृष्ट कराएंगे। ये व्यवस्था पहले ही हो जानी चाहिए थी।
अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास रामायणी कहते हैं कि हमारे यहां मंदिरों में भगवान की सेवा मौसम के हिसाब से की जाती है। उन्हें मौसम के हिसाब से वस्त्र भी पहनाए जाते हैं। ऐसे में रामलला को पूरे वर्ष सिर्फ एक बार ही वस्त्र देना अशोभनीय है। शासन-प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। हमारे आराध्य के लिए नए वस्त्रों की पूरी खेप तैयार होनी चाहिए, इस ओर रिसीवर को भी ध्यान देने की जरूरत है।
विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि रामलला नाबालिग हैं। ऐसे में उनकी सेवा उसी प्रकार होनी चाहिए जिस प्रकार एक बालक की होती है। जैसे बालक को प्रतिदिन नूतन वस्त्र पहनाए जाते हैं, वैसे ही रामलला के लिए भी व्यवस्था होनी चाहिए। ऋतुओं के अनुसार व उत्सवों पर रामलला को नए वस्त्र पहनाने चाहिए। कहा कि शासन-प्रशासन व अदालत सबको इस विषय पर चिंतन करना चाहिए।
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