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सनातन धर्म की रक्षा में सहायक है रामायण मेला

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अयोध्या। चार दिवसीय 40वां रामायण मेला मंगलवार को फीके माहौल में शुरू हो गया। रामायण मेले के उद्घाटन के प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी को आमंत्रित किया गया था, लेकिन वह नहीं आ सके।
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उनकी जगह मणिरामदास की छावनी के श्रीमहंत व राममंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने मेले का उद्घाटन किया।
उन्होंने कहा कि रामायण मेले से न सिर्फ राम व रामायण की संस्कृति का प्रचार-प्रसार होता है बल्कि सनातन धर्म की रक्षा में भी सहायक है। महंत कमलनयन दास ने कहा कि भगवान राम के आदर्शों को ही अपनाकर राष्ट्र की एकता और अखंडता संभव है।
राष्ट्र को संगठित करने के लिए रामायण मेले का आयोजन जरूरी है। हर घर में रामायण हो और सभी को रामायण पढ़ना चाहिए। दिंगबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने कहा कि रामचरित मानस ग्रंथ को लोगों ने अपने जीवन का आधार बना लिया है।
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यह ग्रंथ भारत में ही नहीं पूरे विश्व में आदर्श ग्रंथ के रूप में जाना जाता है। रामायण मेला समिति में शामिल नागा रामलखन दास ने कहा कि प्रशासनिक उदासीनता से रामायण मेले की रौनक फीकी पड़ती जा रही है।
रामायण मेले के पहले दिन भाजपा के नेता भी नहीं पहुंचे। रामायण मेले का स्वरूप अब स्थानीय मेले के जैसा होता जा रहा है। पहले दिन के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अयोध्या की मंडली ने रामलीला मंचन किया।
राजीव रंजन पांडेय ने पखावज वादन, लखनऊ के ओंकार शकधर ने भजन गायन किया। कार्यक्रम का संचालन कमलेश सिंह ने किया। इस मौके पर महंत जन्मेजय शरण, महंत जयरामदास, महंत बलरामदास, संत वरुण दास, पूर्व सांसद डॉ.निर्मल खत्री, डॉ.जर्नादन उपाध्याय, दीप कृष्ण श्रीवास्तव, शरद कुमार त्रिपाठी, डिप्टी कलेक्टर अनामिका श्रीवास्तव, उपनिदेशक सूचना मुरलीधर सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।
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