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रामायणकालीन गुप्तारघाट को मिल सकता स्वदेश दर्शन अवार्ड

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अयोध्या। रामनगरी की पौराणिकता के गवाह त्रेतायुगीन गुप्तारघाट को स्वदेश दर्शन अवार्ड मिल सकता है। सिंचाई विभाग व जल शक्ति विभाग के सरयू नहर खंड ने अवार्ड के लिए आवेदन किया है। गुप्तारघाट की त्रेतायुगीन भव्यता निखरी है, इसका 45 करोड़ की लागत से जीर्णोद्धार कराया गया है।
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भारत सरकार द्वारा स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत अलग-अलग सर्किटों में सुंदर परियोजनाओं को लेकर अवार्ड प्रदान किया जाता है। इसके लिए संबंधित एजेंसियों से आवेदन मांगे गए थे जिसमें गुप्तारघाट परियोजना को भी शामिल किया गया है। अयोध्या को विश्वस्तरीय पर्यटन नगरी के रूप में विकसित करने के लिए कई हजार करोड़ की योजनाओं पर काम चल रहा है।
रामनगरी की प्राचीनता के गवाह कुंड, प्राचीन मंदिर व सरयू घाटों को भव्यता देने के क्रम में ही स्वदेश दर्शन योजना के तहत 45 करोड़ की लागत से त्रेतायुगीन गुप्तारघाट का सरयू नहर खंड द्वारा जीर्णोद्धार कराया गया है। यह परियोजना 2017 में ही प्रस्तावित थी जो अब पूरी हो चुकी है। अवार्ड के लिए आवेदन में फोटोग्राफ और क्यों पुरस्कृत किया जाना चाहिए, इस विषय पर एजेंसी से कमेंट मांगा गया था।
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सरयू नहर खंड के अधिशासी अभियंता जय सिंह के मुताबिक गुप्तारघाट का अपना एक अलग इतिहास है लेकिन यह स्थल वर्षों से उपेक्षित था। इसलिए इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए जीर्णोद्धार के लिए डीपीआर भेजा गया था। शासन से धन का आवंटन होने के बाद इस पर काम शुरू हुआ। इसे भव्यता प्रदान करने का काम पूरा किया जा चुका है। गुप्तारघाट की पौराणिक महिमा अब निखर उठी है, यहां की भव्यता देखते ही बनती है।
पर्यटन मंत्रालय ने राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन और विभिन्न एजेंसियों द्वारा किए गए प्रयासों को सम्मानित करने के लिए विभिन्न श्रेणियों में स्वदेश दर्शन पुरस्कारों का गठन किया है। 2014-15 में शुरू की गई स्वदेश दर्शन योजना एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। इसे भारत में थीम-आधारित पर्यटक सर्किट विकसित करने के उद्देश्य से लांच किया गया था। पर्यटन मंत्रालय इस योजना के तहत सर्किट के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों को केंद्रीय वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
रामनगरी के पश्चिमी छोर पर छावनी क्षेत्र में पुण्य सलिला सरयू के तट पर पौराणिक स्थल के रूप में यह प्राचीन धर्मस्थल है। गुप्तारघाट से जुड़ीं कई मान्यताएं हैं जिसका उल्लेख रूद्रयामल, अयोध्या माहात्म्य व कालिदास के रघुवंशम आदि में मिलता है। ऐसी मान्यता है कि गुप्तारघाट पर ही भगवान राम ने अपने परमधाम पधारने के लिए सरयू में अंतिम डुबकी लगाई थी और उससे पहले चरण चिह्न वाले स्थान पर अपनी खड़ाऊं उतारी थी।
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