अयोध्या। राममंदिर के गर्भगृह के साथ-साथ प्लिंथ व मंदिर को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखने के लिए रिटेनिंग वाल (सुरक्षा दीवार) का भी निर्माण चल रहा है। 12 मीटर गहरी सुरक्षा दीवार की नींव का काम अब पूरा हो चुका है। बरसात से पहले रिटेनिंग वॉल का निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य है।
रामजन्मभूमि परिसर में निर्माणाधीन राममंदिर को भूकंप, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए रिटेनिंग वाल बनाई जा रही है। यह सुरक्षा दीवार मंदिर की तीन दिशाओं पश्चिम, उत्तर व दक्षिण में बन रही है।
पश्चिम में सरयू की धारा मंदिर से नजदीक है ऐसे में इस दिशा में मंदिर को बाढ़ के खतरे से बचाने के लिए सबसे पहले दीवार बनाने का काम शुरू हुआ। तीनों दिशा में रिटेनिंग वाल की नींव का काम पूरा हो चुका है।
यह दीवार जमीन में 12 मीटर गहराई में है। इसमें ग्रेनाइट के पत्थरों को बिछाकर एक चट्टान का रूप दिया गया है। चूंकि ग्रेनाइट के पत्थरों में पानी के रिसाव को सोखने की क्षमता होती है, इसलिए यह दीवार मंदिर को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाएगी।
नींव का काम पूरा होने के बाद अब फिलिंग मैटेरियल बिछाकर दीवार को मजबूती प्रदान की जाएगी। बरसात शुरू होने से पहले सुरक्षा दीवार तैयार करने का लक्ष्य है ताकि बरसात के दौरान कार्य में कोई बाधा न हो।
राममंदिर के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि राममंदिर के गर्भगृह, प्लिंथ व रिटेनिंग वॉल निर्माण का काम एक साथ चल रहा है। सुरक्षा दीवार की नींव का काम पूरा हो चुका है।
वहीं दूसरी तरफ राममंदिर के प्लिंथ का काम भी तेजी से चल रहा है। ग्रेनाइट के पत्थरों से राममंदिर की प्लिंथ बनाई जा रही है। जिसमें पत्थरों के 17 हजार पीस लगने हैं, जिसमें से अब तक 6500 पत्थर लग चुके हैं। दिसंबर 2023 तक गर्भगृह का काम पूरा करने का लक्ष्य है।