अयोध्या। राममंदिर निर्माण का काम तेज हो गया है। अब ट्रस्ट ने एक कदम और आगे बढ़ाते हुए देश के टॉप इंजीनियरों की एक समिति गठित कर दी है। ट्रस्ट ने शनिवार को अधिसूचना जारी करते हुए आठ सदस्यीय तकनीकी विशेषज्ञों की समिति बनाई है।
इस समिति में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, सूरत, गुवाहाटी के विशेषज्ञों को शामिल किया है। अब यही समिति 15 दिसंबर को अपनी रिपोर्ट देगी, जिसके बाद राममंदिर की नींव का काम शुरू करने पर निर्णय लिया जाएगा।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट व निर्माण समिति ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के लिए नींव डिजाइन की समीक्षा और सिफारिशों के लिए संबंधित क्षेत्र में प्रतिष्ठित इंजीनियरों की एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इसका उद्देश्य विभिन्न भू-तकनीकी सुझावों को ध्यान में रखते हुए उच्चतम गुणवत्ता और दीर्घायु के साथ मंदिर का निर्माण करना है। विगत दिनों अयोध्या में राममंदिर निर्माण समिति की बैठक हुई थी।
बैठक में एलएंडटी व टाटा कंसल्टेंसी के इंजीनियरों ने राममंदिर की नींव की जो डिजाइन पेश की थी उस पर सहमति नहीं बन सकी थी। इसको लेकर सभी तकनीकी विशेषज्ञों के अलग-अलग सुझाव थे। जिसके बाद मंदिर निर्माण समिति ने सभी इंजीनियरों को समन्वय बनाकर अपनी रिपोर्ट 15 दिसंबर तक पेश करने के लिए कहा है।
राममंदिर परिसर में जहां नींव की खोदाई की जानी है वहां जमीन के 200 फीट नीचे भुरभुरी बालू मिल रही है जिसका तोड़ निकालने में ट्रस्ट व तकनीकी विशेषज्ञ जुटे हैं। इसके लिए देश भर के टॉप इंजीनियरों की आठ सदस्यीय समिति गठित की गई है जो नींव को लेकर फाइनल डिजाइन तैयार करने में जुटी हुई है। यह समिति 15 दिसंबर को राममंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के समक्ष अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इसके बाद राममंदिर की नींव का काम कब शुरू होगा इस पर निर्णय लिया जाएगा।
समिति देगी राममंदिर के नींव को लेकर अंतिम निर्णय
बताते चलें कि राममंदिर निर्माण की जिम्मेदारी एलएंडटी को सौंपी गयी है। एलएंडटी जहां मंदिर निर्माण होना है वहां की मिट्टी की क्षमता की जांच पहले ही कर चुकी है। जो जांच की गई है उसकी रिपोर्ट एलएंडटी ने राममंदिर के आर्किटेक्ट सीबी सोमपुरा को सौंपी है। इसके बाद आईआई चेन्नई, एनआईटी सूरत और सीबीआरआई रूड़की ने मिट्टी की क्षमता की रिपोर्ट की जांच की।
टाटा कसंल्टेंसी को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट के रूप में ट्रस्ट द्वारा नियुक्त किया गया है। टाटा को एलएंडटी द्वारा तैयार की गयी नींव की डिजाइन को फाइनल करने की जिम्मेदारी दी गई है। इस कार्य में आईआईटी मुंबई सहित अन्य तकनीकी विशेषज्ञों को भी लगाया गया है।
उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही राममंदिर की नींव की डिजाइन फाइनल होगी, साथ ही यह तय होगा कि कौन सा मैटेरियल नींव में इस्तेमाल किया जाए ताकि राममंदिर सैकड़ों वर्षों तक अक्षुण्ण रह सके। अब तकनीकी विशेषज्ञों की समिति का यह काम होगा कि वह एलएंडटी व टाटा द्वारा फाइनल किए गए नींव की डिजाइन को रिव्यू करेगी। इसके बाद समिति चाहेगी तो परिवर्तन के लिए अपने सुझाव भी देगी।
15 मीटर गहराई में बनेगी रिटेनिंग वॉल
माना जा रहा है कि नींव का काम शुरू करने से पहले ट्रस्ट 15 दिसंबर के बाद रिटेनिंग वॉल का कार्य शुरू करने की सहमति दे सकता है। बताया गया कि नींव की 15 मीटर गहराई में पहले रिटेनिंग वॉल बनाई जाएगी। रिटेनिंग वॉल मंदिर के तीन तरफ बनेगी। एक तरफ ओपन रहेगा। रिटेनिंग वॉल सीमेंट या आरसीसी की होगी इसको लेकर 15 दिसंबर को समिति की बैठक में फैसला किया जाएगा। रिटेनिंग वॉल इस तरह बनाया जा रहा है ताकि भूकंप आदि के झटकों से राममंदिर को बचाया जा सके।
समिति में शामिल हैं ये विशेषज्ञ
1. प्रो. वी.एस.राजू: पूर्व निदेशक, आईआईटी दिल्ली : अध्यक्ष
2. प्रो.एन.गोपलाकृष्णन: निदेशक, सीबीआरआई, रुड़की : कन्वेनर
3. प्रो.एस.आर.गांधी: निदेशक, एनआईटी, सूरत : सदस्य
4. प्रो टी जी सीताराम: निदेशक, आईआईटी, गुवाहाटी : सदस्य
5. प्रो बी भट्टाचार्जी: एमेरिटस-प्रोफेसर, आईआईटी, दिल्ली : सदस्य
6. श्री ए.पी. मुल: सलाहकार टीसीई :सदस्य
7. प्रो मनु संथानम: आईआईटी, मद्रास : सदस्य
8. प्रो प्रदीपता बनर्जी: आईआईटी, मुंबई : सदस्य